रविवार, 7 दिसंबर 2014

मैं अपने घर में तो चाय पीता ही हूं परंतु प्रतिदिन एक ठेले में चाय पीने जरूर जाता हूं क्यूंकि इस चाय के टेस्ट का अपना अलग ही आनंद है क्यूंकि वह चाय भले किसी होटल की ना हो भले फाईवस्टार की ना हो वहां कोई सेलिब्रिटी नहीं आते परंतु चाय में ईमानदारी मेहनत की लाजवाब खुशबू है मैं बहुत दिनों पहले उस ठेले पर यूं ही चलते चलते एक सुबह पहुंच गया था चाय की चुस्कियां लेते हुये मेरे कानों में कुछ शब्द गूंजें ये पीछे वाली कंपनी में मैनेजर हूं मैं ओह अच्छा अच्छा फिर चाय का ठेला क्यूं???

मैं बिना पूंछे ही समझ गया कि इन्हें कुछ अधिक पैसों की आवश्यकता है तभी यह सुबह 5:15 पर जगकर सुबह 8:30 तक चाय का ठेला लगाते हैं और उसके बाद नहा धोकर अपनी कंपनी में मैनेजर बनकर जाते हैं। मेरी उंगलियां रूक रहीं हैं क्या लिखूं ऐसे ईमानदार इंसान के बारे में मेरी आंखों में आंसू आ रहे हैं ईमानदारी जहां कहीं दिखती है ऐसे ही छोटी मोटी जगहों पर दिखती है बडी बडी जगहों पर तो स्टार से लेकर सुपर स्टार तक ईमानदारी की बात करते हैं उनकी बातें बडी मीठी प्यारी होती हैं परंतु सच्चाई कितनी होती है यह वक्त ही तय करता है।
मैं जानता हूं यह ईमानदार इंसान कोई स्टार सुपर स्टार नहीं शाहरुख खान नहीं अमिताभ बच्चन नहीं राहुल नहीं ओबामा नहीं कि इसके किस्से गायें जायें इसके किस्से कहानियां कह के क्या फायदा होगा ना बालीवुड में पहचान बनेगी ना हालीवुड में ना किसी पार्टी का टिकट मिलेगा कि बाबू जी खुश हो जायेंगें तो कहीं ना कहीं सर में हाथ रख देगें तो आगे बढ जायेंगे उन्नति होगी।

आज काफी दिनों बाद डरते डरते उसका नाम पूंछा उसने कहा साहब "अल्तमस शेख" ऐसा ही कुछ कहा उसने मेरी आत्मा प्रफुल्लित हुई मेरा सीना चौडा हो गया मेरे मन ने कहा देख सौरभ ये है असली "किंग खान"

अब मैं ही कहता रहूंगा या आप भी कुछ कहोगे मैं जा रहा हूं अपने किंग खान के पास फिर से चाय पीने___

शनिवार, 22 नवंबर 2014

रिश्ते फेशबुक वा पुरातन सामाजिक रिश्ते

वास्तविकता यह है कि स्टेटस आजकल कुछ ज्यादा हो रहे हैं और मैं पिछले तीन दिनों से अपने मिशन पर काम नहीं कर पा रहा हूं क्यूंकि बार बार मन में बहुत से विचार जन्म लेते हैं लिखने को मजबूर हो जाता हूं।

मैने पहले भी लिखा था मित्रता में मीत और इत्र दोनों होना चाहिए तभी वह सही मायने में मित्रता होती है एक दूसरे की चिंता होनी चाहिए और मैं वास्तव में कुछ ज्यादा भावुक हूं जिससे मुझसे जीवन में 1-2 गलतियां भी हुई हैं लेकिन हां मैने जिसे मित्र चुना स्वयं की सोच और समझ से चुना ऐसा कभी नहीं रहा कि फला व्यक्ति फेसबुक में नरेन्द्र मोदी का दोस्त है तो वह मेरा भी दोस्त होगा अब वह अच्छा हो या बुरी मानसिकता का हो।

ऐसा भी कभी नहीं रहा कि कोई राहुल गांधी का फेसबुक मित्र हो और मैं राहुल गांधी को पसंद नहीं करता तो वह मेरा मित्र नहीं हो सकता है अगर इंसान सही है तो विचारधारा कितनी भी विपरीत हो विरोध सिर्फ विचारधारा का होगा मित्रता का नहीं।

मेरी मित्रता सूची में मेरे बहुत से मित्र हैं जो अखिलेश यादव समाजवादी विचारधारा के हैं कांग्रेसी विचारधारा के हैं पर हैं वो मेरे मित्र मैं उनकी पोस्ट पर अपना मतभेद भी व्यक्त कर देता हूं वो भी शालीनता के साथ हां मैने अपने अबतक के फेसबुक के सफर में एक ही बार अभद्रता की है क्यूंकि उस इंसान की छवि मेरी नजरों में कभी भी अच्छी नहीं रही इतना तो ईश्वर ने मुझे भी योग्य बनाया है कि इंसान का चेहरा देखकर एक हद तक पढ लेता हूं अगर उस इंसान के प्रति मेरे मन में थोड़ी भी छवि अच्छी रही होती तो मैं अभद्र ना हो जाता वो भी गुस्से में।

लेकिन मैने पिछले कुछ दिनों में 2-4 अपने ऐसे मित्र देखे जिन्होंने मुझे राहुल गांधी की विचारधारा से ना सहमत होने पर यह कह कर मित्रतासूची से हटाया कि आप राहुल के मित्र नहीं तो हमारे मित्र नहीं है मैं बहुत ही ज्यादा हतप्रभ हो गया कि आज के पहले मेरे इन परममित्र ने ऐसा कभी नहीं कहा कि मैने राहुल की वजह से आपको मित्र बनाया है वास्तव में मैं नरेन्द्र मोदी का समर्थक हूं पर मेरे मित्रों की सूची नरेन्द्र मोदी नहीं तय कर सकते।

मैं अपने मित्र चुनने को सदैव स्वतंत्र रहा हूं मैने अपनी मित्रता सूची में कभी किसी और की वजह से किसी को ना जगह दी और ना किसी की वजह से किसी को हटाया अगर मैं नरेन्द्र मोदी की वजह से किसी समाजवादी विचारधारा के मित्र को मित्रता सूची से हटाऊं तो मुझे यह समझ में आयेगा की मैं अपने स्वयं के मन को संचालित नहीं कर पा रहा हूं मैं नरेन्द्र मोदी का मानसिक गुलाम हो गया फिर और गुलामी किसी भी प्रकार की हो खतरनाक होती है।

हा मैं भी भावनाओं में बहा हूं पर मित्र बनाने और हटाने के मामले में मेरे मन के सिवाय किसी का अधिकार नहीं क्यूंकि मैं किसी का मानसिक गुलाम नहीं बनता और ऐसा होना खतरनाक होता है हमारे जीवन के लिये।
#जय_हिंद

रविवार, 2 नवंबर 2014

सोचा तो लिख ही डालता हूं हृदय से बहुत भावुक हूं तो कैसे रोकता अपनी कलम को चूंकि मैं बहुत संवेदनशील स्वभाव का हूं तो मुझे यह भी ख्याल रहता है कि कहीं मैं इतना तो नहीं लिख जाता कि आप सभी को ऊबाऊ लगता हो और मैं बेरोजगार समझ में आता हूं आपको फुरसत समझ में आता हूं सच कहूं तो मैं फुरसत नहीं रहता फेसबुक तो मैं चलते चलते भी चला लेता हूं।

लिखना सिर्फ इतना था कि मैं दिन प्रतिदन लिखता हूं जो भी मेरे मन के विचार होते हैं मैं उन्हें किसी पैमाने से मापता नहीं कि अच्छा लिखा है या बुरा लिखा है बस सिर्फ इतना ख्याल रखता हूं कि किसी नारी शक्ति की आत्मा आहत ना हो सिर्फ इतना ही मेरे दिल और दिमाग में पैमाना रहता है।

बात सिर्फ यह कहनी थी कि आप सभी का बहुत प्रेम स्नेह मिलता जैसे ही आपका एक लाईक आता है मेरा मन प्रफुल्लित हो जाता है कि वाह शायद मैंने अच्छा लिखा और जब आपकी टिप्पणी आती है तो मैं फूलकर बादल हो जाता हूं जिससे आप सभी का मार्गदर्शन भी मिलता है।

आप सभी का यह प्रेम यह स्नेह मेरे लिये अतुलनीय है और आप सभी अपने आप में बहुत श्रेष्ठ हो जो मुझ साधारण से लडके के लिखे हुए को पसंद और टिप्पणी करते हो वरना वर्तमान परिदृश्य में एक चलन खूब है एक लडकी अपनी फोटो शेयर कर दे या फिर किसी बड़े ओहदेदार प्रतिष्ठित व्यक्ति के द्वारा कुछ भी टूटा फूटा लिखा हो लाईक कमेन्ट की भरमार हो जायेगी लेकिन वहां पर स्वार्थ रहता है "शायद ध्यान दे दे"।

परंतु यहां मैं नहीं आप श्रेष्ठ हो मैं तो सिर्फ सीख रहा हूं और आप सभी के प्रेम स्नेह से जीवन आनंदमयी होता जा रहा है आपके द्वारा की हुई लाईक कमेन्ट मेरे जीवन के लिये जीवनदीप वा मार्गदर्शन हैं।

बुधवार, 29 अक्टूबर 2014

मित्रों 1880 में अल्तामिरा कि गुफायें खोजी गयीं लेकिन अगर इस घटना पर गहराई से सोचा जाये तो अपने आप में एक महत्वपूर्ण घटना था इंसान जीव वा छोटे बड़े ज्ञानी अज्ञानी सभी के महत्व को बखूबी समझा जा सकता है।

एक कुत्ता भूल से एक गुफा के भीतर गिर गया बारिस हुई कुछ गीली मिट्टी उसके ऊपर गिर गयी वह कुत्ता नीचे सरक जाता है और दलदल में फंसकर आवाज करता है।
मर्सिलानो नाम का किसान अपने कुत्ते को बाहर निकालने का प्रयास करता है तभी उसे कुछ हड्डियां दिख जाती हैं और वह इतिहास का विद्यार्थी था वह कुत्ते को निकालकर गुफा के और अंदर जाता रहा प्रतिदिन एक एक हड्डी का अध्ययन करता था एक दिन उसकी 7-8 साल की लडकी कहती है पापा मैं भी चलूंगी पिता उसे ले जाता है मर्सिलानो व्यस्त हो जाता है हड्डियों के अध्ययन मे और सर्च लाईट एकदम पास था लडकी सीलिंग की तरफ यानी कि ऊपर की ओर देखने लगी अचानक से वह बोली पापा पापा ऊपर देखो और इस प्रकार से अल्तामिरा की गुफाओं की खोज हो गयी पिताजी प्रतिदिन जाते थे लेकिन सीलिंग तरफ वह देखते तक नहीं थे वह तो हड्डियां बीनने में व्यस्त थे लेकिन 7-8 वर्ष की छोटी लडकी की वजह से कमाल हो गया विश्व की सबसे प्रसिद्ध गुफाओं की खोज हो सकी जो अपने अद्भुत वा रहस्यमयी चित्रों के लिये आज भी प्रसिद्ध है।

जीवन में होने वाली घटनायें हमें वा हमारे जीवन को कोई नया मोड देती हैं प्रत्येक घटना महत्वपूर्ण है प्रत्येक जीव का महत्व है और छोटे बड़े ज्ञानी अज्ञानी समझदार मूढ का भेद नहीं करना चाहिए सभी अपनी जगह महत्व रखते हैं अगर पिता छोटी बच्ची को छोटी समझता उसकी जिज्ञासा को मार देता तो क्या इन गुफाओं का आविष्कार हो पाता?
शायद नहीं होता क्यूंकि बड़े लोग ज्ञानी लोग एक सीमित दायरे तक ही खोज करते हैं लेकिन एक बचपन का निष्छल मन संपूर्ण ब्रह्मांड को भी खोज सकता है आप लंबाई चौडाई उम्र समझदारी में बड़े हो जाओ मन को बच्चा ही रहने दो फिर देखो ना भेदभाव रहेगा ना मानसिक अवसाद होगा हम थोड़े में खुश रहेगें ज्यादा होने का घमंड नहीं होगा।
मन तो अभी बच्चा है जी।

गुरुवार, 9 अक्टूबर 2014

वर्तमान परिस्थितियों में मित्र एक खोज

आज मित्रता के बारे में सोच रहा हूं मित्र और मित्रता क्या है बड़ा ही कठिन विषय है बहुत ज्यादा तो नहीं लेकिन मीत अर्थात प्यारा हो इस मीत शब्द से बना 'मि'।
मित्र से इत्र का उच्चारण होता है और इत्र सदैव महकता रहत है और इत्र बंद डिब्बी में ही रहता है और मीत अर्थात प्रेम हमेशा छिपा होता है मित्र शब्द में "मीत" और "इत्र" गुप्त रूप से घुले मिले हैं।
अर्थात मित्रता में प्रेम की खुशबू होती है मित्रता अकेलेपन को दूर करती है एक मित्र से हम अपने दुख सुख को साझा करते हैं खून के रिश्तों से इतर मित्रता का सम्बंध अपने आप में अलौकिक है जिस वक्त आपका कोई नहीं होता आप दुख दर्द में होते हैं समस्याओं से घिरे होते हैं तभी एक सच्चा मित्र आपके साथ होता है वह आपकी सहायता करता है और आपके दुखों को हर लेता है बहुतों का जीवन मित्रों के सहारे चलता है।
लेकिन इस जीवन में हम अक्सर समझ नहीं पाते कोई मित्र के रूप में काफी लंबे अरसे तक पीठ में छूरा घोपता रहता है और हम में से कोई एक मित्रता निभाता रहता है यह भी मित्रता की स्वाभाविक कुर्बानी है क्यूंकि मित्र में मीत है प्रेम है और हम इंसान प्रेम में कुर्बान होते रहे हैं।

वह प्रेम ही क्या जो कुर्बानी की खुशबू से ना महके जीवन में मित्रता का यही एक सिक्के के दो पहलू हैं। आप सभी के जीवन में कोई ना कोई मित्र अहम होगा जिसके लिये आपका दिल धडकता होगा और उस मित्र का भी आपके लिये धडकता होगा आप दोनों एक दूसरे के जीवन में एक पूरक का काम करते होगें क्षमतानुसार प्रत्येक मित्र अपने मित्र की मदद करता है।
कृष्ण और सुदामा की मित्रता जग जाहिर है जब भी मित्रता की चर्चा होती है कृष्ण सुदामा का नाम अनपढ की जुबान में मूक और बधिर के हृदय में स्वयमेव समा जाता है।
जैसे जैसे समय आधुनिकता की ओर बढ रहा है वैसे वैसे मित्रता का मीत और इत्र कहीं खोता जा रहा है शायद अधिक व्यस्तता आगे बढने की प्रतिस्पर्धात्मक प्रतियोगिता या फिर इंसान के स्वभाव में कुटिलता छा जाना बहुत से मित्र ऐसे मिलते हैं जो अपने किसी मित्र की कूटनीति कुटिलता अत्यधिक चापलूसी से या तो धोखा खाये या फिर उनकी हरकत से परेशान हैं।
यह समय ऐसा है कि सबकुछ सोच समझकर करने योग्य है लेकिन मित्रता के प्रेम में अंधे हो जाते हैं।
मैं अपने बारे में बताऊं तो मेरे कुछ बचपन के मित्र आज भी उसी सहज भाव से मेरे साथ हैं गरीब अमीर सभी से उतना ही स्नेह प्रेम अनवरत बना हुआ है जब भी मिलते हैं अत्यंत खुश होते हैं कितनी भी दूर रहें संचार माध्यम से बात होती ही रहती है और फिर व्यावसायिक मित्र राजनीतिक मित्र आभासी दुनिया के मित्र सभी से सहज संबंध लेकिन एक मित्र जीवन में ऐसा भी है जिसने बार बार दर्द दिया और हम निभाते चले गये_______


बुधवार, 1 अक्टूबर 2014

कांग्रेस वा धर्मनिरपेक्ष ताकतों में नेतृत्व क्षमता की कमी है

मान ना मान मैं तेरा मेहमान की तर्ज पर नरेन्द्र मोदी जी कम से कम १० वर्ष कांग्रेसी बसपाई सपाई संपूर्ण धर्मनिरपेक्ष साथियों के प्रधानमंत्री अनवरत बने रहेंगे यह कोई भविष्यवाणी नहीं बल्कि मेरा आत्मविश्वास कहता है।

नरेन्द्र मोदी जैसा नेतृत्व कम से कम वर्तमान समय में भारत के किसी भी नेता में नहीं है और धर्मनिरपेक्ष कहलाने वाले ताकतों की एक आंख राहुल गांधी में नेतृत्व क्षमता की कमजोरी है वह मोदी के आसपास नहीं टिकते।
तथाकथित धर्मनिरपेक्ष ताकतों के पास अभी लगभग चार वर्ष ६ महीने हैं ढूंढों खोजो सीखो सिखाओ एकदम दमदार नेता निकाल के लाओ टेस्ट ट्यूब से तो अगले चुनाव में मदारी का खेल देखने में ज्यादा आनंद आयेगा लेकिन जीत तो भारत मां के सपूत नरेन्द्र मोदी की ही होगी।
मोदी जी में गजब की कार्यक्षमता वा नेतृत्व क्षमता है।
अब किसी को इतना वक्त और मौका नहीं कि वह अप्रवासी भारतीयों का दिल जीत सके और मोदी जी ने बाजी मार ली।
खैर ५०० करोड वाले व्हील चमक वाले राहुल जी विदेश तो हमेशा जाते हैं पर वह अपने गुप्त कार्यों में ही व्यस्त रहते हैं कभी इतनी दूरदृष्टि नहीं रही कि अप्रवासी भारतीयों से बैठकर चर्चा करते उनके हालचाल लेते उनकी समस्याओं से रूबरू होते तो शायद वह भारत आकर उनका प्रचार करते और कभी तो बाजी मार लेते।
लेकिन राहुल जी विदेश छुट्टियां मनाने जाते हैं और मोदी जी काम करने जाते हैं यह फर्क है।
जहां राहुल विदेश में गुपचुप तरीके से रहते हैं वही मोदी खुल्लमखुल्ला रहते हैं।
वैसे वैश्विक इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि किसी भारतीय नेता को इतनी ज्यादा तादाद में अप्रवासी भारतीय और विभिन्न देशों की जनता ने एक साथ सुना हो लेकिन फिर भी तथाकथित धर्मनिरपेक्ष सर्वगुण संपन्न ताकतें अपने ही राष्ट्र के प्रधानमंत्री पर कमियां निकालने में व्यस्त हैं राजदीप जैसे इटली बेस्ड पत्रकार जब अमेरिका में राष्ट्रद्रोह जैसा कार्य कर रहे थे तो देशभक्त अप्रवासी भारतीयों ने उन्हें यह बता दिया कि यह अमेरिका है और हम जागरूक भारतीय हैं।
मुझे मोदी जी भाषण सुनकर आभाष हो गया है कि अभी तक तो ऐसे किसी का जन्म नहीं हुआ जो मोदी की जगह ले सके परंतु टेस्ट ट्यूब एक विकल्प है और कुछ हाईट वर्धक और बुद्धिवर्धक शंखपुष्पी प्रकार की आदि दवाईयों का प्रयोग करें तो शायद अगला चुनाव देखने योग्य हो वरना चुनाव एकतरफा मोदी ही जीतेगें।
#कोई_शक?

बुधवार, 24 सितंबर 2014

अकर्मण्य सांसद और राम भरोसे हिंदुस्तान

मित्रों एक समय था जब हम मोदी जी को प्रधानमंत्री बनाने के लिये सोशल मीडिया वा जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे थे मैंने तो पुणे से नौकरी भी छोड दी थी और भी कुछ व्यक्तिगत कारण थे परंतु मोदी मिशन भी दिल दिमाग में था।
               सिर्फ मेरी ही नहीं राष्ट्र के प्रत्येक नवयुवक की यही इच्छा थी और जब मन से ठाना था तो सभी ने त्याग किया यह बीजेपी की जीत कम कांग्रेस के भ्रष्टाचार कुशासन के विरूद्ध जनता वा राष्ट्रवादी नवयुवकों की जीत थी जो विकास और रोजगार चाहते थे इसी उम्मीद के साथ उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश ने मोदी जी को हांथों हाथ लिया बल्कि कहूं तो अपनी गोद में बिठाकर प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचा दिया।
               अब समस्या यह सामने आ रही है कि ज्यादातर समर्थक इतने कम दिनों में ही संपूर्ण विकास चाहते हैं जो जहां से वह वहीं विकास चाहता है जो जिस मुहल्ले से है उस मुहल्ले में सडक चाहता है बिजली चाहता है पानी चाहता है रोजगार चाहता है उनकी सोच गलत भी नहीं है अगर ऐसा हो जाये तो "सोने पे सुहागा" होगा।
          लेकिन जिस कांग्रेस और धर्मनिरपेक्ष ताकतों के शासन के द्वारा हमारा आज तक यह स्वप्न पूर्ण नहीं हुआ तो क्या इन तीन महीनों में ही हमारा स्वप्न साकार हो जायेगा क्या हो जाना चाहिए।
           हम सभी शिक्षित हैं हमें ज्ञात है कि हमारा राष्ट्र लोकतांत्रिक गणराज्य है और प्रादेशिक शासन तथा केंद्रीय शासन में विभक्त है। राष्ट्र के लिये जितनी ज्यादा जिम्मेदार केन्द्र सरकार होती है एक प्रदेश के लिये उतनी ही जिम्मेदार वा ताकतवर प्रादेशिक सरकार होती है।
केन्द्र सरकार के साथ साथ कदम से कदम मिलाकर गरीबी हटाओ विकास पाओ रोजगार दो जैसे उद्देश्य की प्राप्ति प्रादेशिक सरकारें कर सकती हैं और व्यवस्था का एक जाल विछा है जिला तहसील ब्लाक ग्रामसभा स्तर तक सबको जिम्मेदारी निभानी होगी।
अगर मैं वर्तमान हालातों पर नजर डालूं चिंतन करूं तो ऐसा लग रहा है कि भारत को विश्व विजेता बनाने के लिये सचिन और सहवाग की जोडी ओपनिंग बैटिंग अच्छी कर रही है राष्ट्र के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लगातार मेहनत कर रहे हैं वो जापान गये तो कुछ लेकर आये हिन्दी में बोलकर राष्ट्र वा मातृभाषा का गौरव बढाया।
           पाकिस्तान से लगातार कड़े तेवर बनाये रखे और आज अगर वो युद्ध भी कर ले तो विपक्ष और एक बहुतायत जनता ही उनके निर्णय को गलत करार देने लगेगी क्यूंकि युद्ध हमें विकास के मामले में १० वर्ष पीछे ले जा सकता है इसलिए पाक को उसी की भाषा में कूटनीतिक जवाब दिया तो स्थितियां जल्द ही काबू में दिखेगी और जरूरत पडने पर हमारी सेना सदैव तैयार है।
नरेन्द्र मोदी जी की अमेरिका की यात्रा एक बडा संदेश देगी इसके बाद आप सभी को काफी कुछ स्पष्ट नजर आने लगेगा कि हमारा देश किस ओर जा रहा है।
इतने कम समय में बड़े फैसले लिये हैं राम सेतु का ना तोड़ा जाना हिन्दू संस्कृति की रक्षा हेतु अविस्मरणीय कदम है।
बात रही राम मंदिर की तो मामला कोर्ट में विचाराधीन है और राष्ट्र के प्रधानमंत्री का धर्म बनता है कि वह न्यायपालिका के निर्णय का इंतजार करें और वह सपथ भी लेते हैं पद और गोपनीयता की मुझे विश्वास है इस मुद्दे पर भी आप जल्द ही संतुष्ट नजर आयेगें।
     धारा ३७० हटाने के लिये लोकसभा सहित राज्यसभा में भी बहुमत होना चाहिए जो उचित समय पर ही हो सकता है तो जरा धैर्य और इंतजार का मजा लीजिए। आपके शरीर ५० साल का नासूर हो और वह १० दिन की दवा लेकर ठीक हो सकता है क्या ?
कामन सिविल कोड गौ हत्या सब मुद्दे में समय तो लगेगा एक घर की रसोईं चलाने की कठिनाई कोई गृहणी ही बता सकती है यहां तो संपूर्ण राष्ट्र की रसोईं का एक ही मालिक रसोईंयां नरेन्द्र मोदी ही नजर आ रहे हैं क्यूंकि उनके बहुतेरे सांसद खुद जीतकर नहीं आये उन्हें मोदीजीत मिली है इसलिए मोदी जी की मेहनत पर अगर कोई पानी फेर रहा है तो वह कोई और नहीं उनके संसद सदस्य ही अकर्मण्यता वा दलालों के शिकार हो रहे हैं वो सांसद निधि कब कहां कितनी किस विकास कार्य हेतु खर्च करेंगे आज तक कोई जनता के सामने अपनी बात नहीं रख रहे हैं जब वह चुनाव लडते थे तो बोलते थे कि मोदी जी ने कहा है पूरे संसदीय क्षेत्र के आसपास के क्षेत्र में फैक्ट्रियां होगी सबको रोजगार मिलेगा विकास होगा लेकिन जीतने के बाद बहुत से सांसदों ने जनता और समर्थकों को मुंह नहीं दिखाया और सीधे मुह बात नहीं की वो सिर्फ बड़े दलालों को कुर्सी देते हैं और कमीशनबाज़ी की रमझगरी में व्यस्त रहते हुए घूमते फिरते कभी कभी राजनैतिक स्टंट दिखा देते हैं जिससे अगले दिन अखबार के माध्यम से जनता को मालूम हो जाता है कि सांसद जी जिंदा हैं।
जय हिंद #राम_भरोसे_हिंदुस्तान