बुधवार, 7 जनवरी 2015

स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत

स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत में स्वच्छ गांव स्वस्थ गांव एक बडी चुनौती है। स्वच्छता स्वस्थता का यह मिशन हम इंसानों में सर चढकर बोल रहा है लेकिन पिछले वर्ष के दो अक्टूबर से अबतक यह एक शहरी प्रोग्राम ही नजर आ रहा है वह भी सोशल मीडिया और प्रिंट इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से जब कुछ नवयुवकों को झाडू लगाते देखते है।

गली और नाली की साफ सफाई से स्वच्छता तो आ जायेगी और कुछ किटाणु विषाणु के मर जाने से बीमारियां भी कम होगी स्वच्छता के मायने यहां तक तो सही है लेकिन स्वस्थता के मायने बहुत विस्तृत है जैसे की भारत से कुपोषण जड से खत्म होना चाहिये।

बच्चे समाज की रीढ की हड्डी होती है जिन बच्चों का जन्म होता है उन नवजात शिशुओं में कुछ की मृत्यु जन्म के समय ही हो जाती है और कुछ की कुछ समय पश्चात उनमें से बहुत सारे बच्चे कुपोषण के शिकार हो जाते है।

मध्यम वर्गीय अमीर घर आज भी भारत में बहुत कम ही है एक सर्वे के अनुसार 2039 तक भारत में वास्तविक मध्यम वर्गीय परिवार होगें और या उससे ज्यादा भी समय लग सकता है।

आंगनवाडी का एक घोटाला पिछली महाराष्ट्र सरकार के मंत्रालय में किस कदर हुआ वह किसी से छिपा नहीं यह सिर्फ एक घोटाला नहीं नवजात शिशुओं की मौत और गर्भवती मां के लिये अशुभ है।

बालपोषाहार इस हेतु ही आता है कि उसे खाकर बच्चों का कुपोषण खत्म हो सके लेकिन वह बालपोषाहार पात्र बच्चों तक ना पहुचकर बाजार में औने पौने दाम पर बिक रहा है ऐसे ही हालात संपूर्ण राष्ट्र में नवजात शिशु आज भी कुपोषण के शिकार है जबकि अफसर मोटापे के शिकार हो गये भ्रष्टाचारी नेता हाथी पेट वाले हो गये लेकिन राष्ट्र के भविष्य राष्ट्र का वर्तमान बनने से पहले ही जिंदगी और मौत की लडाई लडते है।

गांवों उचित प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधायें ना होने से बुजुर्ग और नौजवानों के भी यही हाल और दवा कराने को दूर अस्पताल में जाना पडता है तबतक हालात क्या होते है कोई बीमार व्यक्ति ही बता सकता है।

इसलिये इस क्षेत्र में अभी बहुत काम करने की आवश्यकता है दिखावे के दीमक को खत्म करना होगा और वास्तव में काम करके स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत स्वच्छ गांव स्वस्थ गांव बनाना चाहिये।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें