बुधवार, 7 जनवरी 2015

फेसबुक में महिला सशक्तिकरण की एक आवाज

आजकल फेसबुक में नारी स्वतंत्रता नारी सशक्तिकरण की बातें एक आंदोलन का रूप ठीक उसी तरह से लेती जा रही हैं जैसे अंग्रेजों से गुलाम भारत को आजाद कराना था।
ऐसे विचार देख सुन पढकर बहुत खुशी होती है कि नारी अब अबला नहीं सबला होने जा रही है। जिस राष्ट्र में सदियों से कहा जाता है "यत्र नारी पूजयेत् तत्र रमंते देवता" उसी राष्ट्र में नारी की दुर्दशा हो रही हो आये दिन बलात्कार हत्या छेडखानी के मामले प्रकाश में आते हैं। पडोस से लेकर सडक तक और आफिस तक जहां देखें वहीं नामर्दों का घूरना और वासना की लालशा जाग्रत रहती है इन सबके खिलाफ नारी अब जाग्रत हो रही है तो बुराई क्या है।
नारी अब ड्रेसकोड के विरूद्ध भी जाग्रत हो रही है अब साड़ी और नारी की स्वछंदता बढती जा रही है वह साड़ी में नारी नहीं दिखना चाहती उसे भी स्वतंत्रता चाहिए फुल जींस हाफ जींस फुल शर्ट हाफ शर्ट लोअर टी शर्ट पहनने की आखिर नारी क्यूं ना पहने अब पुरूष भी तो धोती कुर्ता नहीं पहनते जब धोती कुर्ता वाला पुरूष नहीं तो साड़ी वाली गुलाम मानसिकता की नारी क्यूं देखना चाहते हो ?
नारी कोई राष्ट्र नहीं जिसे गुलाम बनाओ नारी कोई संपदा नहीं जिसका तुम मर्जी अनुसार उपभोग करो नारी कोई विस्तर नहीं जिस पर जब मर्जी आये पैर पसार के सो जाओ नारी भी जीव है प्राणी है उसका सम्मान करना सीखो।
     महिला सशक्तिकरण नारी स्वतंत्रता वाले किसी एक विचार से मेरी बहुत कम पटती या यूं कह लो बहुतायत मेरे सीने में कौतुहल बनकर रहता है। नारी नशा क्यूं ना करे। अरे पुरूष वियर पीते हैं तो हम वियर क्यूं ना पिये पुरूष सिगरेट पीते तो हम सिगरेट क्यूं ना पिये हम गुटका क्यूं ना खायें अगर यही स्वतंत्रता और समानता का पैमाना है तो निडर होकर खायें पियें मुझे व्यक्तिगत कोई समस्या नहीं है लेकिन एक विचार मन में कौध सा गया महाभारत में एक कथानक है वीर अभिमन्यु अपनी मां के कोख में रहते हुए चक्रव्यूह के द्वार तोडना सीख गया था लेकिन मां बताते सो गई थी जिससे अभिमन्यु को अंतिम द्वार तोडने का ज्ञान नहीं था परंतु धर्मयुद्ध था उसे अपनी वीरता का परिचय धर्म की विजय हेतु देना आवश्यक था और परिणाम अभिमन्यु क्रूर कौरवों का शिकार हो गया।
स्त्री को प्रकृति प्रदत्त गर्भ प्रदान है और शिशु अपने अमूल्य जीवन के प्रथम नौ महीने मां के गर्भ में गुजारता है और उसी गर्भ में अभिमन्यु के सरीखे ज्ञान संस्कार अर्जित करता है अगर स्त्रियां अधिक से अधिक मात्रा या कम से कम मात्रा में वियर सिगरेट गुटका खायेगी पियेगी तो क्या गारंटी है गर्भस्थ शिशु पर उसका असर ना पडे जब मां भोजन ग्रहण करती है तो उसी भोजन का तिनका गर्भस्थ शिशु ग्रहण करके जीवित रहता है यानी कि जब मां गर्भित रहती है तृ उसके क्रियाकलापों विचार कुविचार संस्कार कुसंस्कार का असर सीधा सीधा गर्भस्थ शिशु को प्रभावित करते हैं और अगर मां किसी गलत रास्ते पर रहेगी तो हमारी आने वाली पीढियां कैसी होगी एक अभिमन्यु तो सिर्फ इसलिये मारा गया कि उसकी मां अनजाने में सो गयी थी लेकिन अगर पुरूष की गलत बराबरी के चक्कर में नारियां गलत अनुकरण करेंगी तो भविष्य में यह पूरा संसार ही जुआरी शराबी अपराधी हो सकता है क्यूंकि मां के क्रियाकलापों का असर गर्भस्थ शिशु पर अवस्य पडते हैं यह सिर्फ पुरातन आध्यात्मिक ही नहीं आधुनिक वैज्ञानिक सत्य भी है।

नोट- मैं अज्ञानी हूं अभी सीख रहा हूं मैंने कुछ गलत लिखा हो तो मेरी बहनें ,दोस्त मेरा मार्गदर्शन करना मुझे माफ करना मै आपकी प्रत्येक स्वतंत्रता के साथ हूं।

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