ये फेसबुक इसकी दोस्ती इसका रिश्ता क्या कुछ ना देखा इतना कुछ देखा सुना और जाना जो शायद सपने में भी नहीं सोचा था जीवन में कल्पना भी नहीं की थी मैं कहीं रहूं और वहां से मुझे दर्द ना मिले ऐसा कैसे संभव हो सकता है।
क्या कहूं आप सभी से किन भावनाओं से कहूं समय परिस्थितियों ने मुझे क्या कुछ ना सिखाया सच कहूं तो मैं कहना भी नहीं चाहता और शायद मुझे दर्द भी नहीं फिर भी मैं सोचता हूं उनके बारे में जिन्हें बहन माना था जिनके पैर छूने में मुझे बिलकुल भी संकोच नहीं हुआ था क्या पता उन्होंने मेरे पैर छूने को किस भाव से लिया हो लेकिन मेरे हृदय में उनके लिये अगाध सम्मान था है और रहेगा उन्होंने मुझे अपना भाई समझकर आशीर्वाद दिया था या नहीं मुझ अबोध को क्या पता मैं तो यूं ही किसी ना किसी शाम को किसी ना किसी सुबह ढलते सूरज उगते सूरज की लालिमा के साथ अपनी उन बहनों को याद कर लिया करूंगा सच कहूं तो मैं उन्हें याद नहीं करना चाहता लेकिन कहते हैं ना हृदय और भावनाओं पर किसी का जोर नहीं होता ऐसी ही मेरी एक बुआ भी बनी थी जो मुझे अपना भतीजा कहती थीं अक्सर उन्हें भी याद करता हूं उनकी भीनी भीनी मुस्कान अक्सर मुझे मोहित करके मेरे होठों में मुस्कान बिखेर कर निकल जाती हैं।
जुकरबर्ग ने तो क्लिक करते ही आप्शन रखा है अनफ्रेंड और ब्लाक का लेकिन हे भगवान आपने ऐसा क्यूं नहीं किया क्या आप जुकरबर्ग के इतने ज्ञानी नहीं थे कि जिससे रिश्ता खत्म करना हो या जो आपको अपने से दूर करना चाहे या हम किसी को याद ना करना चाहें तो हृदय में एक बटन तो रखी होती जिससे हम उस बटन को फेसबुक की तरह क्लिक करते और ऐसे कुछ रिश्तों को भूल जाते जिनके योग्य हम ना होते।
मैने जिन्हें माना था माना है हृदय की भावभंगिमाओं में बिठाकर माना है। मेरी बचपन से ही आदत है अपनी बात स्पष्ट तरीके से रख देने की मुझे अपना काम निकालना प्रेम मुहब्बत और जरूरत पडने पर बलपूर्वक भी आता है लेकिन रिश्तों में चापलूसी कभी नहीं की जो भी जैसा भी रहा हमेशा सही तरीके से रख दी भले उसमें मेरा कोई नुकसान हो लेकिन मेरा नुकसान शायद ही कोई कर पाये
इस दौरान कुछ एक खुद को भाई कहने कहलाने वाले भी दूर गये कुछ एक मित्र महिला मित्र भी दूर गयीं और एक ऐसी महिला मित्र भी दूर गयीं थी जो वास्तव में मित्रता की पराकाष्ठा में एकदम नजदीक थी लेकिन उन्होंने समझा और वापस मित्र बनीं और मित्रता इसी को कहते हैं नाराज होना बनता है उनका लेकिन अगर मित्रता सच्ची है तो कोई किसी से ज्यादा समय तक दूर नहीं रह पाता।
मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं इस दौरान जो भी हुआ वह एक बुरा और अच्छा दोनों तरह का अनुभव था मैने जिसे भी अपना मित्र अपना भाई अपनी बहन माना पूर्ण मनोयोग से होशोहवास में माना था है मैने किसी की वजह से किसी को कुछ नहीं माना कि वह फला की मित्रता सूची में है तो मेरा मित्र या भाई बहन होगा होगी आप मेरे हृदय में थे और रहेंगे लेकिन इतना ज्ञान अवश्य हुआ कि आपने मुझे अपना नहीं माना था बल्कि किसी और की वजह से कुछ माना था लेकिन जो मेरी बहनें हैं मेरी बुआ हैं अगर जीवन में कभी सामने मिली भी तो मैं वैसे ही झुकूंगा जैसे पहले झुकता था या कभी इनबॉक्स में चरणस्पर्श बोला होगा मेरे एहसास में मेरी नजर में यही रिश्ता है।
मुझसे जो भी गलती हुयी हो क्षमाप्रार्थी हूं परंतु अपनी बात रखने से ना कभी पीछे हटा ना हटूंगा।
इस दौरान एक बहन और जीजाजी भी मिले जो मुझे आज भी उतना ही प्यार करते हैं जितना पहले दिन करते थे मैं नाम नहीं लूंगा दीदू और जीजाजी पढते ही समझ जायंगे।
नोट- इसे किसी भी प्रकार से गलत अर्थों में ना लें यब गिनती की बहन बुआ भाई मित्र के लिये है ना किसी समूह परिवार रिश्तों के लिये।
क्या कहूं आप सभी से किन भावनाओं से कहूं समय परिस्थितियों ने मुझे क्या कुछ ना सिखाया सच कहूं तो मैं कहना भी नहीं चाहता और शायद मुझे दर्द भी नहीं फिर भी मैं सोचता हूं उनके बारे में जिन्हें बहन माना था जिनके पैर छूने में मुझे बिलकुल भी संकोच नहीं हुआ था क्या पता उन्होंने मेरे पैर छूने को किस भाव से लिया हो लेकिन मेरे हृदय में उनके लिये अगाध सम्मान था है और रहेगा उन्होंने मुझे अपना भाई समझकर आशीर्वाद दिया था या नहीं मुझ अबोध को क्या पता मैं तो यूं ही किसी ना किसी शाम को किसी ना किसी सुबह ढलते सूरज उगते सूरज की लालिमा के साथ अपनी उन बहनों को याद कर लिया करूंगा सच कहूं तो मैं उन्हें याद नहीं करना चाहता लेकिन कहते हैं ना हृदय और भावनाओं पर किसी का जोर नहीं होता ऐसी ही मेरी एक बुआ भी बनी थी जो मुझे अपना भतीजा कहती थीं अक्सर उन्हें भी याद करता हूं उनकी भीनी भीनी मुस्कान अक्सर मुझे मोहित करके मेरे होठों में मुस्कान बिखेर कर निकल जाती हैं।
जुकरबर्ग ने तो क्लिक करते ही आप्शन रखा है अनफ्रेंड और ब्लाक का लेकिन हे भगवान आपने ऐसा क्यूं नहीं किया क्या आप जुकरबर्ग के इतने ज्ञानी नहीं थे कि जिससे रिश्ता खत्म करना हो या जो आपको अपने से दूर करना चाहे या हम किसी को याद ना करना चाहें तो हृदय में एक बटन तो रखी होती जिससे हम उस बटन को फेसबुक की तरह क्लिक करते और ऐसे कुछ रिश्तों को भूल जाते जिनके योग्य हम ना होते।
मैने जिन्हें माना था माना है हृदय की भावभंगिमाओं में बिठाकर माना है। मेरी बचपन से ही आदत है अपनी बात स्पष्ट तरीके से रख देने की मुझे अपना काम निकालना प्रेम मुहब्बत और जरूरत पडने पर बलपूर्वक भी आता है लेकिन रिश्तों में चापलूसी कभी नहीं की जो भी जैसा भी रहा हमेशा सही तरीके से रख दी भले उसमें मेरा कोई नुकसान हो लेकिन मेरा नुकसान शायद ही कोई कर पाये
इस दौरान कुछ एक खुद को भाई कहने कहलाने वाले भी दूर गये कुछ एक मित्र महिला मित्र भी दूर गयीं और एक ऐसी महिला मित्र भी दूर गयीं थी जो वास्तव में मित्रता की पराकाष्ठा में एकदम नजदीक थी लेकिन उन्होंने समझा और वापस मित्र बनीं और मित्रता इसी को कहते हैं नाराज होना बनता है उनका लेकिन अगर मित्रता सच्ची है तो कोई किसी से ज्यादा समय तक दूर नहीं रह पाता।
मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं इस दौरान जो भी हुआ वह एक बुरा और अच्छा दोनों तरह का अनुभव था मैने जिसे भी अपना मित्र अपना भाई अपनी बहन माना पूर्ण मनोयोग से होशोहवास में माना था है मैने किसी की वजह से किसी को कुछ नहीं माना कि वह फला की मित्रता सूची में है तो मेरा मित्र या भाई बहन होगा होगी आप मेरे हृदय में थे और रहेंगे लेकिन इतना ज्ञान अवश्य हुआ कि आपने मुझे अपना नहीं माना था बल्कि किसी और की वजह से कुछ माना था लेकिन जो मेरी बहनें हैं मेरी बुआ हैं अगर जीवन में कभी सामने मिली भी तो मैं वैसे ही झुकूंगा जैसे पहले झुकता था या कभी इनबॉक्स में चरणस्पर्श बोला होगा मेरे एहसास में मेरी नजर में यही रिश्ता है।
मुझसे जो भी गलती हुयी हो क्षमाप्रार्थी हूं परंतु अपनी बात रखने से ना कभी पीछे हटा ना हटूंगा।
इस दौरान एक बहन और जीजाजी भी मिले जो मुझे आज भी उतना ही प्यार करते हैं जितना पहले दिन करते थे मैं नाम नहीं लूंगा दीदू और जीजाजी पढते ही समझ जायंगे।
नोट- इसे किसी भी प्रकार से गलत अर्थों में ना लें यब गिनती की बहन बुआ भाई मित्र के लिये है ना किसी समूह परिवार रिश्तों के लिये।
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