रविवार, 2 नवंबर 2014

सोचा तो लिख ही डालता हूं हृदय से बहुत भावुक हूं तो कैसे रोकता अपनी कलम को चूंकि मैं बहुत संवेदनशील स्वभाव का हूं तो मुझे यह भी ख्याल रहता है कि कहीं मैं इतना तो नहीं लिख जाता कि आप सभी को ऊबाऊ लगता हो और मैं बेरोजगार समझ में आता हूं आपको फुरसत समझ में आता हूं सच कहूं तो मैं फुरसत नहीं रहता फेसबुक तो मैं चलते चलते भी चला लेता हूं।

लिखना सिर्फ इतना था कि मैं दिन प्रतिदन लिखता हूं जो भी मेरे मन के विचार होते हैं मैं उन्हें किसी पैमाने से मापता नहीं कि अच्छा लिखा है या बुरा लिखा है बस सिर्फ इतना ख्याल रखता हूं कि किसी नारी शक्ति की आत्मा आहत ना हो सिर्फ इतना ही मेरे दिल और दिमाग में पैमाना रहता है।

बात सिर्फ यह कहनी थी कि आप सभी का बहुत प्रेम स्नेह मिलता जैसे ही आपका एक लाईक आता है मेरा मन प्रफुल्लित हो जाता है कि वाह शायद मैंने अच्छा लिखा और जब आपकी टिप्पणी आती है तो मैं फूलकर बादल हो जाता हूं जिससे आप सभी का मार्गदर्शन भी मिलता है।

आप सभी का यह प्रेम यह स्नेह मेरे लिये अतुलनीय है और आप सभी अपने आप में बहुत श्रेष्ठ हो जो मुझ साधारण से लडके के लिखे हुए को पसंद और टिप्पणी करते हो वरना वर्तमान परिदृश्य में एक चलन खूब है एक लडकी अपनी फोटो शेयर कर दे या फिर किसी बड़े ओहदेदार प्रतिष्ठित व्यक्ति के द्वारा कुछ भी टूटा फूटा लिखा हो लाईक कमेन्ट की भरमार हो जायेगी लेकिन वहां पर स्वार्थ रहता है "शायद ध्यान दे दे"।

परंतु यहां मैं नहीं आप श्रेष्ठ हो मैं तो सिर्फ सीख रहा हूं और आप सभी के प्रेम स्नेह से जीवन आनंदमयी होता जा रहा है आपके द्वारा की हुई लाईक कमेन्ट मेरे जीवन के लिये जीवनदीप वा मार्गदर्शन हैं।

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