आज मित्रता के बारे में सोच रहा हूं मित्र और मित्रता क्या है बड़ा ही कठिन विषय है बहुत ज्यादा तो नहीं लेकिन मीत अर्थात प्यारा हो इस मीत शब्द से बना 'मि'।
मित्र से इत्र का उच्चारण होता है और इत्र सदैव महकता रहत है और इत्र बंद डिब्बी में ही रहता है और मीत अर्थात प्रेम हमेशा छिपा होता है मित्र शब्द में "मीत" और "इत्र" गुप्त रूप से घुले मिले हैं।
अर्थात मित्रता में प्रेम की खुशबू होती है मित्रता अकेलेपन को दूर करती है एक मित्र से हम अपने दुख सुख को साझा करते हैं खून के रिश्तों से इतर मित्रता का सम्बंध अपने आप में अलौकिक है जिस वक्त आपका कोई नहीं होता आप दुख दर्द में होते हैं समस्याओं से घिरे होते हैं तभी एक सच्चा मित्र आपके साथ होता है वह आपकी सहायता करता है और आपके दुखों को हर लेता है बहुतों का जीवन मित्रों के सहारे चलता है।
लेकिन इस जीवन में हम अक्सर समझ नहीं पाते कोई मित्र के रूप में काफी लंबे अरसे तक पीठ में छूरा घोपता रहता है और हम में से कोई एक मित्रता निभाता रहता है यह भी मित्रता की स्वाभाविक कुर्बानी है क्यूंकि मित्र में मीत है प्रेम है और हम इंसान प्रेम में कुर्बान होते रहे हैं।
वह प्रेम ही क्या जो कुर्बानी की खुशबू से ना महके जीवन में मित्रता का यही एक सिक्के के दो पहलू हैं। आप सभी के जीवन में कोई ना कोई मित्र अहम होगा जिसके लिये आपका दिल धडकता होगा और उस मित्र का भी आपके लिये धडकता होगा आप दोनों एक दूसरे के जीवन में एक पूरक का काम करते होगें क्षमतानुसार प्रत्येक मित्र अपने मित्र की मदद करता है।
कृष्ण और सुदामा की मित्रता जग जाहिर है जब भी मित्रता की चर्चा होती है कृष्ण सुदामा का नाम अनपढ की जुबान में मूक और बधिर के हृदय में स्वयमेव समा जाता है।
जैसे जैसे समय आधुनिकता की ओर बढ रहा है वैसे वैसे मित्रता का मीत और इत्र कहीं खोता जा रहा है शायद अधिक व्यस्तता आगे बढने की प्रतिस्पर्धात्मक प्रतियोगिता या फिर इंसान के स्वभाव में कुटिलता छा जाना बहुत से मित्र ऐसे मिलते हैं जो अपने किसी मित्र की कूटनीति कुटिलता अत्यधिक चापलूसी से या तो धोखा खाये या फिर उनकी हरकत से परेशान हैं।
यह समय ऐसा है कि सबकुछ सोच समझकर करने योग्य है लेकिन मित्रता के प्रेम में अंधे हो जाते हैं।
मैं अपने बारे में बताऊं तो मेरे कुछ बचपन के मित्र आज भी उसी सहज भाव से मेरे साथ हैं गरीब अमीर सभी से उतना ही स्नेह प्रेम अनवरत बना हुआ है जब भी मिलते हैं अत्यंत खुश होते हैं कितनी भी दूर रहें संचार माध्यम से बात होती ही रहती है और फिर व्यावसायिक मित्र राजनीतिक मित्र आभासी दुनिया के मित्र सभी से सहज संबंध लेकिन एक मित्र जीवन में ऐसा भी है जिसने बार बार दर्द दिया और हम निभाते चले गये_______
मित्र से इत्र का उच्चारण होता है और इत्र सदैव महकता रहत है और इत्र बंद डिब्बी में ही रहता है और मीत अर्थात प्रेम हमेशा छिपा होता है मित्र शब्द में "मीत" और "इत्र" गुप्त रूप से घुले मिले हैं।
अर्थात मित्रता में प्रेम की खुशबू होती है मित्रता अकेलेपन को दूर करती है एक मित्र से हम अपने दुख सुख को साझा करते हैं खून के रिश्तों से इतर मित्रता का सम्बंध अपने आप में अलौकिक है जिस वक्त आपका कोई नहीं होता आप दुख दर्द में होते हैं समस्याओं से घिरे होते हैं तभी एक सच्चा मित्र आपके साथ होता है वह आपकी सहायता करता है और आपके दुखों को हर लेता है बहुतों का जीवन मित्रों के सहारे चलता है।
लेकिन इस जीवन में हम अक्सर समझ नहीं पाते कोई मित्र के रूप में काफी लंबे अरसे तक पीठ में छूरा घोपता रहता है और हम में से कोई एक मित्रता निभाता रहता है यह भी मित्रता की स्वाभाविक कुर्बानी है क्यूंकि मित्र में मीत है प्रेम है और हम इंसान प्रेम में कुर्बान होते रहे हैं।
वह प्रेम ही क्या जो कुर्बानी की खुशबू से ना महके जीवन में मित्रता का यही एक सिक्के के दो पहलू हैं। आप सभी के जीवन में कोई ना कोई मित्र अहम होगा जिसके लिये आपका दिल धडकता होगा और उस मित्र का भी आपके लिये धडकता होगा आप दोनों एक दूसरे के जीवन में एक पूरक का काम करते होगें क्षमतानुसार प्रत्येक मित्र अपने मित्र की मदद करता है।
कृष्ण और सुदामा की मित्रता जग जाहिर है जब भी मित्रता की चर्चा होती है कृष्ण सुदामा का नाम अनपढ की जुबान में मूक और बधिर के हृदय में स्वयमेव समा जाता है।
जैसे जैसे समय आधुनिकता की ओर बढ रहा है वैसे वैसे मित्रता का मीत और इत्र कहीं खोता जा रहा है शायद अधिक व्यस्तता आगे बढने की प्रतिस्पर्धात्मक प्रतियोगिता या फिर इंसान के स्वभाव में कुटिलता छा जाना बहुत से मित्र ऐसे मिलते हैं जो अपने किसी मित्र की कूटनीति कुटिलता अत्यधिक चापलूसी से या तो धोखा खाये या फिर उनकी हरकत से परेशान हैं।
यह समय ऐसा है कि सबकुछ सोच समझकर करने योग्य है लेकिन मित्रता के प्रेम में अंधे हो जाते हैं।
मैं अपने बारे में बताऊं तो मेरे कुछ बचपन के मित्र आज भी उसी सहज भाव से मेरे साथ हैं गरीब अमीर सभी से उतना ही स्नेह प्रेम अनवरत बना हुआ है जब भी मिलते हैं अत्यंत खुश होते हैं कितनी भी दूर रहें संचार माध्यम से बात होती ही रहती है और फिर व्यावसायिक मित्र राजनीतिक मित्र आभासी दुनिया के मित्र सभी से सहज संबंध लेकिन एक मित्र जीवन में ऐसा भी है जिसने बार बार दर्द दिया और हम निभाते चले गये_______
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