रविवार, 7 दिसंबर 2014

मैं अपने घर में तो चाय पीता ही हूं परंतु प्रतिदिन एक ठेले में चाय पीने जरूर जाता हूं क्यूंकि इस चाय के टेस्ट का अपना अलग ही आनंद है क्यूंकि वह चाय भले किसी होटल की ना हो भले फाईवस्टार की ना हो वहां कोई सेलिब्रिटी नहीं आते परंतु चाय में ईमानदारी मेहनत की लाजवाब खुशबू है मैं बहुत दिनों पहले उस ठेले पर यूं ही चलते चलते एक सुबह पहुंच गया था चाय की चुस्कियां लेते हुये मेरे कानों में कुछ शब्द गूंजें ये पीछे वाली कंपनी में मैनेजर हूं मैं ओह अच्छा अच्छा फिर चाय का ठेला क्यूं???

मैं बिना पूंछे ही समझ गया कि इन्हें कुछ अधिक पैसों की आवश्यकता है तभी यह सुबह 5:15 पर जगकर सुबह 8:30 तक चाय का ठेला लगाते हैं और उसके बाद नहा धोकर अपनी कंपनी में मैनेजर बनकर जाते हैं। मेरी उंगलियां रूक रहीं हैं क्या लिखूं ऐसे ईमानदार इंसान के बारे में मेरी आंखों में आंसू आ रहे हैं ईमानदारी जहां कहीं दिखती है ऐसे ही छोटी मोटी जगहों पर दिखती है बडी बडी जगहों पर तो स्टार से लेकर सुपर स्टार तक ईमानदारी की बात करते हैं उनकी बातें बडी मीठी प्यारी होती हैं परंतु सच्चाई कितनी होती है यह वक्त ही तय करता है।
मैं जानता हूं यह ईमानदार इंसान कोई स्टार सुपर स्टार नहीं शाहरुख खान नहीं अमिताभ बच्चन नहीं राहुल नहीं ओबामा नहीं कि इसके किस्से गायें जायें इसके किस्से कहानियां कह के क्या फायदा होगा ना बालीवुड में पहचान बनेगी ना हालीवुड में ना किसी पार्टी का टिकट मिलेगा कि बाबू जी खुश हो जायेंगें तो कहीं ना कहीं सर में हाथ रख देगें तो आगे बढ जायेंगे उन्नति होगी।

आज काफी दिनों बाद डरते डरते उसका नाम पूंछा उसने कहा साहब "अल्तमस शेख" ऐसा ही कुछ कहा उसने मेरी आत्मा प्रफुल्लित हुई मेरा सीना चौडा हो गया मेरे मन ने कहा देख सौरभ ये है असली "किंग खान"

अब मैं ही कहता रहूंगा या आप भी कुछ कहोगे मैं जा रहा हूं अपने किंग खान के पास फिर से चाय पीने___

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