गुरुवार, 18 दिसंबर 2014

कौन कहता है कि मुसलमान ईमानदार नहीं होते , मैं आतंकवादियों की बात नहीं करता

आप सभी को कल अपने अल्तमस शेख ए रियल किंग खान की कहानी सुनायी थी आप सभी को बहुत पसंद आयी थी और आपकी टिप्पडियों से मेरे साथ आपके ईमानदारी धैर्य साहस आदर्शवाद के किंग खान का भी उत्साहवर्धन हुआ।

आज मैने जिंदगी के संघर्षपथ को तय करने वाले असली किंग खान से थोड़ी बातें की उनसे उनकी जिंदगी की कहानी पूंछी वह कहने लगे साहब मेरे पिताजी मुझे सात साल की उम्र में छोडकर चले गये थे उनके इस दुनिया में ना रहने पर गरीबी की मार से मुझे ज्यादा पढने लिखने का अवसर नहीं मिला एक क्लास पढकर गुजरात की एक होटल में पच्चीस पैसे से नौकरी शुरू की थी तब सस्ते का जमाना था मैं था मेरी मां थी मेरे भाई चाचा के साथ रहते थे होटल में नौकरी करते हुये सवा रूपये तक मेरी सैलरी पहुंची थी फिर मैं चौदह वर्ष की उम्र में नौकरी की तलाश में भटकते हुये पुणे आ गया मैं पढा लिखा नहीं विद्यालय नहीं गया मदरसा नहीं गया लेकिन मैने जीवन में कुछ ऐसे ही पढाई की जीवन के संघर्ष की पढाई की कमाता गया सीखता गया पुणे में सवा सौ रूपये की नौकरी की और जीवनयापन करने लगा मैने अपने जीवन में बहुत संघर्ष किया साहब।

हम बहुत गरीब थे और आज भी गरीबी से संघर्ष कर रहा हूं बस इतना है कि एक कंपनी में चौदह हजार में मैनेजर हूं और सुबह सुबह ये चाय का ठेला लगा रहा हूं मैने पूंछा कब से आप ठेला लगा रहे हो वह कहने लगे साहब ठेला तो अभी कुछ महीने पहले लिया इसके पहले एक टेबल में प्रतिदिन चाय बनाता था और आप सभी के आते जाते धंधा बढने लगा थोडा पैसा हुआ और मैने ठेला ले लिया देखो आप सभी इस ईमानदारी की हांथ गाडी में कितनी चमक है मुझे ये हाथ गाडी में आसमान में चमकते टिमटिमाते तारों की तरह चमक दिख रही है।

मैने पूंछा और आपके बीबी बच्चे फिर उसने एक और अच्छी बात बतायी उसने कहा मैने इक्कीस साल की उम्र में शादी किया था वो भी दिन में बिना दहेज लिये किया था वह कहने लगा साहब पहले लोगों में इंसानियत बहुत थी अब तो पूना बदल गया है अब वो बात कहां रही पूना में पूना कितना बदला है यह कभी और बताऊंगा अभी तो आप यह जानों कि मेरे रियल किंग खान ने एक बेटा भी गोद लिया हुआ है उसके आगे पीछे कोई नहीं था और उस बेटे को गोद लेने के तीन साल बाद उसके घर में कन्यारत्न का जन्म होता है आज वो अपनी पत्नी अपने बेटे बेटी के साथ ईमानदारी की चादर में गरीबी से संघर्ष करते हुये अपने जीवन को जी रहा है वह कभी नहीं भटका ना तो आतंकवादी बना और ना ही नक्सलवादी बना उसे इतने पैसे की दरकार कभी नहीं रही कि वह अपना मार्ग भटकता बल्कि वह किसी भी आदर्शवाद ईमानदारी भावनाओं संबंधों की बात करने वालों से कहीं ज्यादा उच्च आदर्शों की परिपाटी पर चलकर अपने बीबी बच्चों को पाल पोष रहा है।

उसने शादी की तो दिन में की बिना दहेज के की जीवन जिया ईमानदारी से ब्यापार किया ईमानदारी से अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा अच्छे संस्कार दे रहा है वह भी ईमानदारी के खनकते सिक्को से बडी बडी नोटों में बेईमानी की 'बू' आ सकती है परंतु इसके पास ईमानदारी की नोट है।

यानी की अगर आपका आत्मबल मजबूत है आप आत्मा से संस्कारवान है अपनी मां अपनी भारत मां के प्रति ईमानदार हैं तो क्या हिंदू क्या मुस्लिम हर एक इंसान ईमानदार होता है ये है मेरा अल्तमस शेख "ए रियल किंग खान"

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें