आज मैं अपना चश्मा उतार के लिख रहा हूं क्यूंकि मैं नहीं चाहता की आज कोई आवरण रहे।
दिल से निकले हुये शब्दों को उनकी पवित्रता को खुली आंखों से मैं स्वयं देखना और एहसास करना चाहता हूं।
आज मैं मित्रता रिश्ते की कल्पना में डूब गया हूं भावनाओं के जल में तैर रहा हूं खुले आसमान में सूर्य के मधुर ताप में मुझे भावनाओं के नीर में तैरना बहुत सुखद एहसास दे रहा है।
मैं अपने काल्पनिक कहानी के मित्र को क्या नाम दूं और अगर मैं अपने काल्पनिक मित्र को एक नवयुवती मित्र बना दूं तो कहानी दिलचस्प हो जायेगी और लिख रहा हूं फेसबुक पर तो वह नवकिशोरी मित्र फेसबुक से ही हो तो कहानी की दिलचस्पी में मधु की चासनी आ जायेगी।
आहा मधु, हां मधु की मिठास मैने तो यूं ही शहद की मिठास को याद करते हुये, शहद शब्द की जगह मधु नाम ले लिया था तो क्यूं ना अब अपनी मित्र को मधु नाम दे दूं।
उसके ऊपर मधु नाम कितना प्यारा लगेगा यह मैने भी आज तक नहीं सोचा था सच में उसकी आवाज में वो मिठास है मुस्कान में वह मादकता है कि जब जब उसकी आवाज सुनी उस मिठास से मेरा हृदय पुलकित हो उठता है और मुस्कुराहट देखकर मेरी आंखें बंद होने लगती है पता है क्यूं मैं कैसे कहूं लेकिन सच यही है कि मैं उसकी मुस्कान के नशे में खोने लगता हूं।
दिल और धडकनों के बीच अजीब सी सुरसुराहट होने लगती है और पेट में उस वक्त गुदगुदी होने लगती है जब उसका सुंदर सा चेहरा भीनी भीनी मुस्कान के साथ मुझे दिखता है और वह प्यार से अपने कण्ठ से कोयल की तरह मुझे हाय बोलती है।
मैं स्तब्ध रह जाता हूं एक पल के लिये ठहर सा जाता हूं मेरे होंठ आपस में चिपक जाते है मेरे गले से आवाज निकलने को होती है पर मैं कुछ पल बोल नहीं पाता बडी मुश्किल से मैने भी हल्की सी आवाज में हलो कहा वो भी सर के साथ पलकें झुकाते हुये और खो गया था उससे मिलने की खुशी में।
सच में मेरा झूम जाने का मन कर रहा था पर अफसोस वहां कोई एकांत नहीं था खचाखच भरे हुए चौराहे में मैं कैसे झूमता आखिर ये जालिम दुनिया मेरी खुशी को देखकर उस पर नजर जो लगा देती और मेरी मां ने मुझे काजल देकर भी नहीं भेजा था कि काजल की एक टिपकी अपने और उसके लगा देता जिससे चौराहे मे विचरण कर रहे नजरबंटों की नजर ना लगती।
जब मैं उससे मिला तो एक पल को मन किया कि उसे गले लगा लूं लेकिन वो एक नवयुवती है और मैं नवयुवक हूं और भरे चौराहे में गले कैसे लगाता मैं भी कपोल कल्पनाओं में खो जाता हूं क्या वो मुझे गले लगाती और वो भी चौराहे में कभी नहीं क्यंकि वह भारतीय संस्कृति की महिला है उसके लिये मान मर्यादा रिश्तों में पवित्रता यह सब बहुत मायने रखता है।
हां एक बार अगर कहीं एकांत में मुलाकात हुयी होती थोडा और समय होता कुछ और देर बातें कर लेता थोडा आत्मविश्वास आ जाता तब शायद मधु से कह पाता उसकी हथेलियों को अपनी हंथेलियों में भर लेता और नजरें नीचे झुका कर आह यह क्या मेरी तो सांसें तेज हो गयी कैसे कह पाऊंगा अपनी गुलाबी मधु से कि क्या वह मुझे अपने गले से लगायेगी ?
पश्चिमी सभ्यता में गले लगना कोई तोप चीज नहीं है यह काम छूमंतर में हो जाता है परंतु भारतीय संस्कृति में एक लडका और एक लडकी कहीं गले मिल लें और कोई आंदोलनकारी देख ले तो बाप रे बाप ब्रेकिंग न्यूज और दिल्ली के रामलीला मैदान मे जनता परिवार का धरना प्रदर्शन चालू हो जायेगा।
खाप पंचायत मौत का फरमान सुना देगी या समाज से बेदखल कर देगी क्या है ना देश और समाज के बारे में सोचता हूं तो प्रेम के बीच में ये राजनीति भी घुस आयी नहीं नहीं मेरी गलती नहीं वास्तव में प्रेम के बीच में राजनीति ने जबरदस्ती दखल दिया है।
मुझे क्या करना है मैं तो अपनी मधु के साथ हूं उसके साथ रहने का सुखद एहसास कर रहा हूं।
यह तो बताना भूल ही गया कि मधु मुझे पहली बार मिली थी एक शादी समारोह में जब मैने उसे पहली बार देखा था तब वह अपनी सखियों के साथ खाना खा रही थी मैं उसे पहचानने की कोशिश कर रहा था लेकिन तबतक वह मुझे पहचान चुकी थी फिर थोडी सी बातें हुयी दुनिया समाज लोगों की बातों के डर से आगे बढ लिया मैं किसी ना किसी से मुलाकात कर रहा था पर दिल मधु के लिये तडप रहा था।
मेरी आंखें स्वचलित हो गयी थी वह अपने आप मधु की तरफ एकटक निगाह से पहुच जाती थी और मधु के मुस्कुराते हुये चेहरे पर टिक जाती थी लेकिन जैसे ही मधु की आंखें मेरी तरफ निहारने लगती तो मेरी आंखें तुरंत नजरें चुरा लेती और ऐसा करती कि जैसे मधु को एकटक निगाह से निहार ही नहीं रही थी ये नजरे भी बडी चतुर होती है।
मैं स्वयं को रोक नहीं पाया और हल्के हल्के कदमों से चोरी चोरी टहलते हुये यूं ही पहुचा मधु के पास और बस एक सीधे सरल स्वभाव के लडके की तरह बैठ गया हम दोनों के बीच में ज्यादा फासला नहीं था बित्ते भर का फर्क था और महक सकता था मधु के देह की खुशबू को उसकी मुस्कान से तो वैसे भी कहर ढा रही थी बस कुछ बातें की और फिर वही जमाने का भय फिर क्या मैं मन मसोस कर उठ खडा हुआ और दुखी मन से अपनी टेबल पर आके बैठ गया था पर चोरी चोरी देखने का सिलसिला बंद नहीं हुआ।
मैं उस समारोह से वापस आ गया इस कशिश के साथ कि ज्यादा देर तक बैठ नहीं पाया बातें नहीं कर पाया लेकिन मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा जब मेरे मोबाइल की घंटी बजी ट्रिंग ट्रिंग ट्रिंग और जैसे ही मोबाइल जेब से निकाला था वह मेरी दोस्त मधु का काल था और मैंने झूम करके मन ही मन खुशियां मना ली।
हैलो हां मधु ओह आपका काल आया।
उधर से मधु की मीठी मीठी आवाज आयी हां मैं मधु फिर हमारी बातें होने लगी और मैं बात करके बहुत खुश हुआ कि चलो मधु को मुझ में कुछ अच्छाई जरूर दिखी जो उसने मुझे फोन किया अब मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था एक अच्छी दोस्त जो मिली थी।
कहते है जीवन मे अच्छा दोस्त मिल जाये तो जिंदगी में खुशियों का अंबार लग जाता है।
मैने सोचा भी नहीं था कि कोई मुझे इतना मानेगा कि खुद होके मिलने को सोचे और यह पूछे कि आपकी प्लेन कब है मैं उससे पहले मिलना चाहती हूं लेकिन दुर्भाग्य टिकट लेने की एक समस्या थी और मेरा दुर्भाग्य मेरे सामने मुझे चुनौती दे रहा था एक फिर मैं अपने दुर्भाग्य से लड रहा था।
आज मधु मिलना चाहती थी और सामने समय की समस्या लेकिन अगली सुबह दुर्भाग्य से लडा और साथ दिया मधु ने मैं टिकट लेकर वापस आ चुका था और मधु से बात की फिर मधु अपने लंच टाईम में अपनी हांडा सिटी से सिटी के ट्रैफिक को चीरते हुये आ गयी इसको ही कहते है सच्चाई जो यह बता सके कि हां हम मित्र है।
जबकि सोचने वाले सोच समझ सकते थे कि नवयुवती और नवयुवक के बीच मित्रता कैसे संभव है हमारे यहां सबसे पहले और अंतिम निर्णय में एक लडका और लडकी के संबंध को आशिकी के तराजू मे ही तौलते है ही।
लेकिन मधु आज के जमाने की है वह निडर भी है कोई कुछ भी सोचे लोगों का काम है सोचना पर जमाने से डर तो लगता है।
खैर यह मेरी जिंदगी का पहला अवसर था जब कोई नवयुवती मित्र मुझे विदा करने आयी थी और इतना मान सम्मान प्रेम स्नेह दिया।
मधू मेरी वह मित्र है जिससे मैने अपने जीवन के दर्द भी कहे है और उसने उस दर्द को अपने ही सीने में अपने ही जीवन के राज की तरह दबा कर रखा है।
मैने सुनी थी एक कहावत कि महिलाओं के पेट में बात नहीं पचती पता नहीं हो सकता है पर मधु कमाल की है मेरे राज को अपने सीने में अपने सीने से लगाकर यूं ही छिपा लिया है कि जमाने को पता ना चले और जमाने के लोग हंस गा न सकें अब यह तो तय हो चुका है कि कहावत कोई भी हो सभी पर सत्य नहीं प्रतीत होती मधु की बात पचाने की क्षमता ने महिलाओं पर कही गयी इस कहावत को झुंठला दिया था और क्या लडके/पुरूष हर बात को पचा ही लेते हैं बल्कि चौराहे पर जोर जोर से चिल्ला के ठहाके मारते हुये पुरूष पर्याप्त देखे जा सकते है।
जब मधु मिलने आयी थी पिंक सूट में खूबसूरत परी की तरह लग रही थी जब वह मेरी तरफ आ रही थी क्या कयामत ढा रही थी उसकी सुंदरता के साथ जब उसकी सीरत मिल जाती है तो वह मुझे दुनिया की किसी भी लडकी से ज्यादा खूबसूरत और परी नजर आती है मेरे लिये तो मेरी मधु बार्बी डाल है।
क्या ऐश्वर्या क्या कैटरीना नो करीना नो करिश्मा सिर्फ और सिर्फ मेरी मधु मेरी दोस्त सुंदरता की बेमिशाल मूरत है और उसकी सुंदरता में चार चांद लगाती है उसकी सीरत मित्रता निभाने की सोच जिस तरह से आज तक उसने मित्रता निभायी पूरे ईमान के साथ हो सकता है किसी और की इतनी प्यारी मित्र हो इस दुनिया में पर मेरी तो मधु ही है।
(कहानी पूर्णतया कल्पनाओं पर आधारित है कृपया कयास ना लगायें)
दिल से निकले हुये शब्दों को उनकी पवित्रता को खुली आंखों से मैं स्वयं देखना और एहसास करना चाहता हूं।
आज मैं मित्रता रिश्ते की कल्पना में डूब गया हूं भावनाओं के जल में तैर रहा हूं खुले आसमान में सूर्य के मधुर ताप में मुझे भावनाओं के नीर में तैरना बहुत सुखद एहसास दे रहा है।
मैं अपने काल्पनिक कहानी के मित्र को क्या नाम दूं और अगर मैं अपने काल्पनिक मित्र को एक नवयुवती मित्र बना दूं तो कहानी दिलचस्प हो जायेगी और लिख रहा हूं फेसबुक पर तो वह नवकिशोरी मित्र फेसबुक से ही हो तो कहानी की दिलचस्पी में मधु की चासनी आ जायेगी।
आहा मधु, हां मधु की मिठास मैने तो यूं ही शहद की मिठास को याद करते हुये, शहद शब्द की जगह मधु नाम ले लिया था तो क्यूं ना अब अपनी मित्र को मधु नाम दे दूं।
उसके ऊपर मधु नाम कितना प्यारा लगेगा यह मैने भी आज तक नहीं सोचा था सच में उसकी आवाज में वो मिठास है मुस्कान में वह मादकता है कि जब जब उसकी आवाज सुनी उस मिठास से मेरा हृदय पुलकित हो उठता है और मुस्कुराहट देखकर मेरी आंखें बंद होने लगती है पता है क्यूं मैं कैसे कहूं लेकिन सच यही है कि मैं उसकी मुस्कान के नशे में खोने लगता हूं।
दिल और धडकनों के बीच अजीब सी सुरसुराहट होने लगती है और पेट में उस वक्त गुदगुदी होने लगती है जब उसका सुंदर सा चेहरा भीनी भीनी मुस्कान के साथ मुझे दिखता है और वह प्यार से अपने कण्ठ से कोयल की तरह मुझे हाय बोलती है।
मैं स्तब्ध रह जाता हूं एक पल के लिये ठहर सा जाता हूं मेरे होंठ आपस में चिपक जाते है मेरे गले से आवाज निकलने को होती है पर मैं कुछ पल बोल नहीं पाता बडी मुश्किल से मैने भी हल्की सी आवाज में हलो कहा वो भी सर के साथ पलकें झुकाते हुये और खो गया था उससे मिलने की खुशी में।
सच में मेरा झूम जाने का मन कर रहा था पर अफसोस वहां कोई एकांत नहीं था खचाखच भरे हुए चौराहे में मैं कैसे झूमता आखिर ये जालिम दुनिया मेरी खुशी को देखकर उस पर नजर जो लगा देती और मेरी मां ने मुझे काजल देकर भी नहीं भेजा था कि काजल की एक टिपकी अपने और उसके लगा देता जिससे चौराहे मे विचरण कर रहे नजरबंटों की नजर ना लगती।
जब मैं उससे मिला तो एक पल को मन किया कि उसे गले लगा लूं लेकिन वो एक नवयुवती है और मैं नवयुवक हूं और भरे चौराहे में गले कैसे लगाता मैं भी कपोल कल्पनाओं में खो जाता हूं क्या वो मुझे गले लगाती और वो भी चौराहे में कभी नहीं क्यंकि वह भारतीय संस्कृति की महिला है उसके लिये मान मर्यादा रिश्तों में पवित्रता यह सब बहुत मायने रखता है।
हां एक बार अगर कहीं एकांत में मुलाकात हुयी होती थोडा और समय होता कुछ और देर बातें कर लेता थोडा आत्मविश्वास आ जाता तब शायद मधु से कह पाता उसकी हथेलियों को अपनी हंथेलियों में भर लेता और नजरें नीचे झुका कर आह यह क्या मेरी तो सांसें तेज हो गयी कैसे कह पाऊंगा अपनी गुलाबी मधु से कि क्या वह मुझे अपने गले से लगायेगी ?
पश्चिमी सभ्यता में गले लगना कोई तोप चीज नहीं है यह काम छूमंतर में हो जाता है परंतु भारतीय संस्कृति में एक लडका और एक लडकी कहीं गले मिल लें और कोई आंदोलनकारी देख ले तो बाप रे बाप ब्रेकिंग न्यूज और दिल्ली के रामलीला मैदान मे जनता परिवार का धरना प्रदर्शन चालू हो जायेगा।
खाप पंचायत मौत का फरमान सुना देगी या समाज से बेदखल कर देगी क्या है ना देश और समाज के बारे में सोचता हूं तो प्रेम के बीच में ये राजनीति भी घुस आयी नहीं नहीं मेरी गलती नहीं वास्तव में प्रेम के बीच में राजनीति ने जबरदस्ती दखल दिया है।
मुझे क्या करना है मैं तो अपनी मधु के साथ हूं उसके साथ रहने का सुखद एहसास कर रहा हूं।
यह तो बताना भूल ही गया कि मधु मुझे पहली बार मिली थी एक शादी समारोह में जब मैने उसे पहली बार देखा था तब वह अपनी सखियों के साथ खाना खा रही थी मैं उसे पहचानने की कोशिश कर रहा था लेकिन तबतक वह मुझे पहचान चुकी थी फिर थोडी सी बातें हुयी दुनिया समाज लोगों की बातों के डर से आगे बढ लिया मैं किसी ना किसी से मुलाकात कर रहा था पर दिल मधु के लिये तडप रहा था।
मेरी आंखें स्वचलित हो गयी थी वह अपने आप मधु की तरफ एकटक निगाह से पहुच जाती थी और मधु के मुस्कुराते हुये चेहरे पर टिक जाती थी लेकिन जैसे ही मधु की आंखें मेरी तरफ निहारने लगती तो मेरी आंखें तुरंत नजरें चुरा लेती और ऐसा करती कि जैसे मधु को एकटक निगाह से निहार ही नहीं रही थी ये नजरे भी बडी चतुर होती है।
मैं स्वयं को रोक नहीं पाया और हल्के हल्के कदमों से चोरी चोरी टहलते हुये यूं ही पहुचा मधु के पास और बस एक सीधे सरल स्वभाव के लडके की तरह बैठ गया हम दोनों के बीच में ज्यादा फासला नहीं था बित्ते भर का फर्क था और महक सकता था मधु के देह की खुशबू को उसकी मुस्कान से तो वैसे भी कहर ढा रही थी बस कुछ बातें की और फिर वही जमाने का भय फिर क्या मैं मन मसोस कर उठ खडा हुआ और दुखी मन से अपनी टेबल पर आके बैठ गया था पर चोरी चोरी देखने का सिलसिला बंद नहीं हुआ।
मैं उस समारोह से वापस आ गया इस कशिश के साथ कि ज्यादा देर तक बैठ नहीं पाया बातें नहीं कर पाया लेकिन मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा जब मेरे मोबाइल की घंटी बजी ट्रिंग ट्रिंग ट्रिंग और जैसे ही मोबाइल जेब से निकाला था वह मेरी दोस्त मधु का काल था और मैंने झूम करके मन ही मन खुशियां मना ली।
हैलो हां मधु ओह आपका काल आया।
उधर से मधु की मीठी मीठी आवाज आयी हां मैं मधु फिर हमारी बातें होने लगी और मैं बात करके बहुत खुश हुआ कि चलो मधु को मुझ में कुछ अच्छाई जरूर दिखी जो उसने मुझे फोन किया अब मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था एक अच्छी दोस्त जो मिली थी।
कहते है जीवन मे अच्छा दोस्त मिल जाये तो जिंदगी में खुशियों का अंबार लग जाता है।
मैने सोचा भी नहीं था कि कोई मुझे इतना मानेगा कि खुद होके मिलने को सोचे और यह पूछे कि आपकी प्लेन कब है मैं उससे पहले मिलना चाहती हूं लेकिन दुर्भाग्य टिकट लेने की एक समस्या थी और मेरा दुर्भाग्य मेरे सामने मुझे चुनौती दे रहा था एक फिर मैं अपने दुर्भाग्य से लड रहा था।
आज मधु मिलना चाहती थी और सामने समय की समस्या लेकिन अगली सुबह दुर्भाग्य से लडा और साथ दिया मधु ने मैं टिकट लेकर वापस आ चुका था और मधु से बात की फिर मधु अपने लंच टाईम में अपनी हांडा सिटी से सिटी के ट्रैफिक को चीरते हुये आ गयी इसको ही कहते है सच्चाई जो यह बता सके कि हां हम मित्र है।
जबकि सोचने वाले सोच समझ सकते थे कि नवयुवती और नवयुवक के बीच मित्रता कैसे संभव है हमारे यहां सबसे पहले और अंतिम निर्णय में एक लडका और लडकी के संबंध को आशिकी के तराजू मे ही तौलते है ही।
लेकिन मधु आज के जमाने की है वह निडर भी है कोई कुछ भी सोचे लोगों का काम है सोचना पर जमाने से डर तो लगता है।
खैर यह मेरी जिंदगी का पहला अवसर था जब कोई नवयुवती मित्र मुझे विदा करने आयी थी और इतना मान सम्मान प्रेम स्नेह दिया।
मधू मेरी वह मित्र है जिससे मैने अपने जीवन के दर्द भी कहे है और उसने उस दर्द को अपने ही सीने में अपने ही जीवन के राज की तरह दबा कर रखा है।
मैने सुनी थी एक कहावत कि महिलाओं के पेट में बात नहीं पचती पता नहीं हो सकता है पर मधु कमाल की है मेरे राज को अपने सीने में अपने सीने से लगाकर यूं ही छिपा लिया है कि जमाने को पता ना चले और जमाने के लोग हंस गा न सकें अब यह तो तय हो चुका है कि कहावत कोई भी हो सभी पर सत्य नहीं प्रतीत होती मधु की बात पचाने की क्षमता ने महिलाओं पर कही गयी इस कहावत को झुंठला दिया था और क्या लडके/पुरूष हर बात को पचा ही लेते हैं बल्कि चौराहे पर जोर जोर से चिल्ला के ठहाके मारते हुये पुरूष पर्याप्त देखे जा सकते है।
जब मधु मिलने आयी थी पिंक सूट में खूबसूरत परी की तरह लग रही थी जब वह मेरी तरफ आ रही थी क्या कयामत ढा रही थी उसकी सुंदरता के साथ जब उसकी सीरत मिल जाती है तो वह मुझे दुनिया की किसी भी लडकी से ज्यादा खूबसूरत और परी नजर आती है मेरे लिये तो मेरी मधु बार्बी डाल है।
क्या ऐश्वर्या क्या कैटरीना नो करीना नो करिश्मा सिर्फ और सिर्फ मेरी मधु मेरी दोस्त सुंदरता की बेमिशाल मूरत है और उसकी सुंदरता में चार चांद लगाती है उसकी सीरत मित्रता निभाने की सोच जिस तरह से आज तक उसने मित्रता निभायी पूरे ईमान के साथ हो सकता है किसी और की इतनी प्यारी मित्र हो इस दुनिया में पर मेरी तो मधु ही है।
(कहानी पूर्णतया कल्पनाओं पर आधारित है कृपया कयास ना लगायें)
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