फेसबुक में लिखने वालों की कमी नहीं है सभी कुछ ना कुछ लिखते हैं और लिखने वाले पाठक भी हैं लेकिन जितना मन से आप लिखते हो क्या उतने मन से आप पढते हो??
क्या आप किसी लेख को पढकर उसकी कुछ लाईन कुछ शब्दों से क्या भविष्य का आंकलन करते हैं ?
क्या आप सच और झूंठ की मिलावट का आंकलन कर पाते हैं?
दूधवाला अपने दूध में पानी मिलाये ना मिलाये पर आपको शक बना रहता है और निगाहें पैनी रहती हैं।
इसी तरह से अपने दिमाग के को केन्द्रित करिये की आप क्या पढ रहे हो और आपका लेखक आपको क्या परोस रहा है उससे समाज को फायदा है या ब्यक्तिगत लेखक को फायदा है कोई लेखक सिर्फ अपने लिये लिख रहा है या फिर उसके लेख राष्ट्र वा समाज को निहस्वार्थ भाव से समर्पित हैं।
पैसे तो डाकू भी कमा लेता है लेकिन डाकू का पैसा डाकू का ही होता है अंशमात्र शायद समाज को फायदा होता हो।
इसी प्रकार उत्तम लेख वही है जिससे सच का उजागर हो राष्ट्र को ताकत प्रदान हो राष्ट्र का भविष्य अच्छा हो और अच्छा पाठक वही है जो एक एक लाईन और शब्द का अंदाजा लगा लें कि इसका भविष्य क्या हो सकता है।
इज्जत इंसान कि की जाती है अगर उससे राष्ट्र को नुकसान हो तो अपना मत रखने की हिम्मत रखने वाला ही सच्चा और अच्छा पाठक होता है।
मैं भी एक पाठक हूं
क्या आप किसी लेख को पढकर उसकी कुछ लाईन कुछ शब्दों से क्या भविष्य का आंकलन करते हैं ?
क्या आप सच और झूंठ की मिलावट का आंकलन कर पाते हैं?
दूधवाला अपने दूध में पानी मिलाये ना मिलाये पर आपको शक बना रहता है और निगाहें पैनी रहती हैं।
इसी तरह से अपने दिमाग के को केन्द्रित करिये की आप क्या पढ रहे हो और आपका लेखक आपको क्या परोस रहा है उससे समाज को फायदा है या ब्यक्तिगत लेखक को फायदा है कोई लेखक सिर्फ अपने लिये लिख रहा है या फिर उसके लेख राष्ट्र वा समाज को निहस्वार्थ भाव से समर्पित हैं।
पैसे तो डाकू भी कमा लेता है लेकिन डाकू का पैसा डाकू का ही होता है अंशमात्र शायद समाज को फायदा होता हो।
इसी प्रकार उत्तम लेख वही है जिससे सच का उजागर हो राष्ट्र को ताकत प्रदान हो राष्ट्र का भविष्य अच्छा हो और अच्छा पाठक वही है जो एक एक लाईन और शब्द का अंदाजा लगा लें कि इसका भविष्य क्या हो सकता है।
इज्जत इंसान कि की जाती है अगर उससे राष्ट्र को नुकसान हो तो अपना मत रखने की हिम्मत रखने वाला ही सच्चा और अच्छा पाठक होता है।
मैं भी एक पाठक हूं
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