वास्तविकता यह है कि स्टेटस आजकल कुछ ज्यादा हो रहे हैं और मैं पिछले तीन दिनों से अपने मिशन पर काम नहीं कर पा रहा हूं क्यूंकि बार बार मन में बहुत से विचार जन्म लेते हैं लिखने को मजबूर हो जाता हूं।
मैने पहले भी लिखा था मित्रता में मीत और इत्र दोनों होना चाहिए तभी वह सही मायने में मित्रता होती है एक दूसरे की चिंता होनी चाहिए और मैं वास्तव में कुछ ज्यादा भावुक हूं जिससे मुझसे जीवन में 1-2 गलतियां भी हुई हैं लेकिन हां मैने जिसे मित्र चुना स्वयं की सोच और समझ से चुना ऐसा कभी नहीं रहा कि फला व्यक्ति फेसबुक में नरेन्द्र मोदी का दोस्त है तो वह मेरा भी दोस्त होगा अब वह अच्छा हो या बुरी मानसिकता का हो।
ऐसा भी कभी नहीं रहा कि कोई राहुल गांधी का फेसबुक मित्र हो और मैं राहुल गांधी को पसंद नहीं करता तो वह मेरा मित्र नहीं हो सकता है अगर इंसान सही है तो विचारधारा कितनी भी विपरीत हो विरोध सिर्फ विचारधारा का होगा मित्रता का नहीं।
मेरी मित्रता सूची में मेरे बहुत से मित्र हैं जो अखिलेश यादव समाजवादी विचारधारा के हैं कांग्रेसी विचारधारा के हैं पर हैं वो मेरे मित्र मैं उनकी पोस्ट पर अपना मतभेद भी व्यक्त कर देता हूं वो भी शालीनता के साथ हां मैने अपने अबतक के फेसबुक के सफर में एक ही बार अभद्रता की है क्यूंकि उस इंसान की छवि मेरी नजरों में कभी भी अच्छी नहीं रही इतना तो ईश्वर ने मुझे भी योग्य बनाया है कि इंसान का चेहरा देखकर एक हद तक पढ लेता हूं अगर उस इंसान के प्रति मेरे मन में थोड़ी भी छवि अच्छी रही होती तो मैं अभद्र ना हो जाता वो भी गुस्से में।
लेकिन मैने पिछले कुछ दिनों में 2-4 अपने ऐसे मित्र देखे जिन्होंने मुझे राहुल गांधी की विचारधारा से ना सहमत होने पर यह कह कर मित्रतासूची से हटाया कि आप राहुल के मित्र नहीं तो हमारे मित्र नहीं है मैं बहुत ही ज्यादा हतप्रभ हो गया कि आज के पहले मेरे इन परममित्र ने ऐसा कभी नहीं कहा कि मैने राहुल की वजह से आपको मित्र बनाया है वास्तव में मैं नरेन्द्र मोदी का समर्थक हूं पर मेरे मित्रों की सूची नरेन्द्र मोदी नहीं तय कर सकते।
मैं अपने मित्र चुनने को सदैव स्वतंत्र रहा हूं मैने अपनी मित्रता सूची में कभी किसी और की वजह से किसी को ना जगह दी और ना किसी की वजह से किसी को हटाया अगर मैं नरेन्द्र मोदी की वजह से किसी समाजवादी विचारधारा के मित्र को मित्रता सूची से हटाऊं तो मुझे यह समझ में आयेगा की मैं अपने स्वयं के मन को संचालित नहीं कर पा रहा हूं मैं नरेन्द्र मोदी का मानसिक गुलाम हो गया फिर और गुलामी किसी भी प्रकार की हो खतरनाक होती है।
हा मैं भी भावनाओं में बहा हूं पर मित्र बनाने और हटाने के मामले में मेरे मन के सिवाय किसी का अधिकार नहीं क्यूंकि मैं किसी का मानसिक गुलाम नहीं बनता और ऐसा होना खतरनाक होता है हमारे जीवन के लिये।
#जय_हिंद
मैने पहले भी लिखा था मित्रता में मीत और इत्र दोनों होना चाहिए तभी वह सही मायने में मित्रता होती है एक दूसरे की चिंता होनी चाहिए और मैं वास्तव में कुछ ज्यादा भावुक हूं जिससे मुझसे जीवन में 1-2 गलतियां भी हुई हैं लेकिन हां मैने जिसे मित्र चुना स्वयं की सोच और समझ से चुना ऐसा कभी नहीं रहा कि फला व्यक्ति फेसबुक में नरेन्द्र मोदी का दोस्त है तो वह मेरा भी दोस्त होगा अब वह अच्छा हो या बुरी मानसिकता का हो।
ऐसा भी कभी नहीं रहा कि कोई राहुल गांधी का फेसबुक मित्र हो और मैं राहुल गांधी को पसंद नहीं करता तो वह मेरा मित्र नहीं हो सकता है अगर इंसान सही है तो विचारधारा कितनी भी विपरीत हो विरोध सिर्फ विचारधारा का होगा मित्रता का नहीं।
मेरी मित्रता सूची में मेरे बहुत से मित्र हैं जो अखिलेश यादव समाजवादी विचारधारा के हैं कांग्रेसी विचारधारा के हैं पर हैं वो मेरे मित्र मैं उनकी पोस्ट पर अपना मतभेद भी व्यक्त कर देता हूं वो भी शालीनता के साथ हां मैने अपने अबतक के फेसबुक के सफर में एक ही बार अभद्रता की है क्यूंकि उस इंसान की छवि मेरी नजरों में कभी भी अच्छी नहीं रही इतना तो ईश्वर ने मुझे भी योग्य बनाया है कि इंसान का चेहरा देखकर एक हद तक पढ लेता हूं अगर उस इंसान के प्रति मेरे मन में थोड़ी भी छवि अच्छी रही होती तो मैं अभद्र ना हो जाता वो भी गुस्से में।
लेकिन मैने पिछले कुछ दिनों में 2-4 अपने ऐसे मित्र देखे जिन्होंने मुझे राहुल गांधी की विचारधारा से ना सहमत होने पर यह कह कर मित्रतासूची से हटाया कि आप राहुल के मित्र नहीं तो हमारे मित्र नहीं है मैं बहुत ही ज्यादा हतप्रभ हो गया कि आज के पहले मेरे इन परममित्र ने ऐसा कभी नहीं कहा कि मैने राहुल की वजह से आपको मित्र बनाया है वास्तव में मैं नरेन्द्र मोदी का समर्थक हूं पर मेरे मित्रों की सूची नरेन्द्र मोदी नहीं तय कर सकते।
मैं अपने मित्र चुनने को सदैव स्वतंत्र रहा हूं मैने अपनी मित्रता सूची में कभी किसी और की वजह से किसी को ना जगह दी और ना किसी की वजह से किसी को हटाया अगर मैं नरेन्द्र मोदी की वजह से किसी समाजवादी विचारधारा के मित्र को मित्रता सूची से हटाऊं तो मुझे यह समझ में आयेगा की मैं अपने स्वयं के मन को संचालित नहीं कर पा रहा हूं मैं नरेन्द्र मोदी का मानसिक गुलाम हो गया फिर और गुलामी किसी भी प्रकार की हो खतरनाक होती है।
हा मैं भी भावनाओं में बहा हूं पर मित्र बनाने और हटाने के मामले में मेरे मन के सिवाय किसी का अधिकार नहीं क्यूंकि मैं किसी का मानसिक गुलाम नहीं बनता और ऐसा होना खतरनाक होता है हमारे जीवन के लिये।
#जय_हिंद