शनिवार, 22 नवंबर 2014

रिश्ते फेशबुक वा पुरातन सामाजिक रिश्ते

वास्तविकता यह है कि स्टेटस आजकल कुछ ज्यादा हो रहे हैं और मैं पिछले तीन दिनों से अपने मिशन पर काम नहीं कर पा रहा हूं क्यूंकि बार बार मन में बहुत से विचार जन्म लेते हैं लिखने को मजबूर हो जाता हूं।

मैने पहले भी लिखा था मित्रता में मीत और इत्र दोनों होना चाहिए तभी वह सही मायने में मित्रता होती है एक दूसरे की चिंता होनी चाहिए और मैं वास्तव में कुछ ज्यादा भावुक हूं जिससे मुझसे जीवन में 1-2 गलतियां भी हुई हैं लेकिन हां मैने जिसे मित्र चुना स्वयं की सोच और समझ से चुना ऐसा कभी नहीं रहा कि फला व्यक्ति फेसबुक में नरेन्द्र मोदी का दोस्त है तो वह मेरा भी दोस्त होगा अब वह अच्छा हो या बुरी मानसिकता का हो।

ऐसा भी कभी नहीं रहा कि कोई राहुल गांधी का फेसबुक मित्र हो और मैं राहुल गांधी को पसंद नहीं करता तो वह मेरा मित्र नहीं हो सकता है अगर इंसान सही है तो विचारधारा कितनी भी विपरीत हो विरोध सिर्फ विचारधारा का होगा मित्रता का नहीं।

मेरी मित्रता सूची में मेरे बहुत से मित्र हैं जो अखिलेश यादव समाजवादी विचारधारा के हैं कांग्रेसी विचारधारा के हैं पर हैं वो मेरे मित्र मैं उनकी पोस्ट पर अपना मतभेद भी व्यक्त कर देता हूं वो भी शालीनता के साथ हां मैने अपने अबतक के फेसबुक के सफर में एक ही बार अभद्रता की है क्यूंकि उस इंसान की छवि मेरी नजरों में कभी भी अच्छी नहीं रही इतना तो ईश्वर ने मुझे भी योग्य बनाया है कि इंसान का चेहरा देखकर एक हद तक पढ लेता हूं अगर उस इंसान के प्रति मेरे मन में थोड़ी भी छवि अच्छी रही होती तो मैं अभद्र ना हो जाता वो भी गुस्से में।

लेकिन मैने पिछले कुछ दिनों में 2-4 अपने ऐसे मित्र देखे जिन्होंने मुझे राहुल गांधी की विचारधारा से ना सहमत होने पर यह कह कर मित्रतासूची से हटाया कि आप राहुल के मित्र नहीं तो हमारे मित्र नहीं है मैं बहुत ही ज्यादा हतप्रभ हो गया कि आज के पहले मेरे इन परममित्र ने ऐसा कभी नहीं कहा कि मैने राहुल की वजह से आपको मित्र बनाया है वास्तव में मैं नरेन्द्र मोदी का समर्थक हूं पर मेरे मित्रों की सूची नरेन्द्र मोदी नहीं तय कर सकते।

मैं अपने मित्र चुनने को सदैव स्वतंत्र रहा हूं मैने अपनी मित्रता सूची में कभी किसी और की वजह से किसी को ना जगह दी और ना किसी की वजह से किसी को हटाया अगर मैं नरेन्द्र मोदी की वजह से किसी समाजवादी विचारधारा के मित्र को मित्रता सूची से हटाऊं तो मुझे यह समझ में आयेगा की मैं अपने स्वयं के मन को संचालित नहीं कर पा रहा हूं मैं नरेन्द्र मोदी का मानसिक गुलाम हो गया फिर और गुलामी किसी भी प्रकार की हो खतरनाक होती है।

हा मैं भी भावनाओं में बहा हूं पर मित्र बनाने और हटाने के मामले में मेरे मन के सिवाय किसी का अधिकार नहीं क्यूंकि मैं किसी का मानसिक गुलाम नहीं बनता और ऐसा होना खतरनाक होता है हमारे जीवन के लिये।
#जय_हिंद

रविवार, 2 नवंबर 2014

सोचा तो लिख ही डालता हूं हृदय से बहुत भावुक हूं तो कैसे रोकता अपनी कलम को चूंकि मैं बहुत संवेदनशील स्वभाव का हूं तो मुझे यह भी ख्याल रहता है कि कहीं मैं इतना तो नहीं लिख जाता कि आप सभी को ऊबाऊ लगता हो और मैं बेरोजगार समझ में आता हूं आपको फुरसत समझ में आता हूं सच कहूं तो मैं फुरसत नहीं रहता फेसबुक तो मैं चलते चलते भी चला लेता हूं।

लिखना सिर्फ इतना था कि मैं दिन प्रतिदन लिखता हूं जो भी मेरे मन के विचार होते हैं मैं उन्हें किसी पैमाने से मापता नहीं कि अच्छा लिखा है या बुरा लिखा है बस सिर्फ इतना ख्याल रखता हूं कि किसी नारी शक्ति की आत्मा आहत ना हो सिर्फ इतना ही मेरे दिल और दिमाग में पैमाना रहता है।

बात सिर्फ यह कहनी थी कि आप सभी का बहुत प्रेम स्नेह मिलता जैसे ही आपका एक लाईक आता है मेरा मन प्रफुल्लित हो जाता है कि वाह शायद मैंने अच्छा लिखा और जब आपकी टिप्पणी आती है तो मैं फूलकर बादल हो जाता हूं जिससे आप सभी का मार्गदर्शन भी मिलता है।

आप सभी का यह प्रेम यह स्नेह मेरे लिये अतुलनीय है और आप सभी अपने आप में बहुत श्रेष्ठ हो जो मुझ साधारण से लडके के लिखे हुए को पसंद और टिप्पणी करते हो वरना वर्तमान परिदृश्य में एक चलन खूब है एक लडकी अपनी फोटो शेयर कर दे या फिर किसी बड़े ओहदेदार प्रतिष्ठित व्यक्ति के द्वारा कुछ भी टूटा फूटा लिखा हो लाईक कमेन्ट की भरमार हो जायेगी लेकिन वहां पर स्वार्थ रहता है "शायद ध्यान दे दे"।

परंतु यहां मैं नहीं आप श्रेष्ठ हो मैं तो सिर्फ सीख रहा हूं और आप सभी के प्रेम स्नेह से जीवन आनंदमयी होता जा रहा है आपके द्वारा की हुई लाईक कमेन्ट मेरे जीवन के लिये जीवनदीप वा मार्गदर्शन हैं।