मित्रों 1880 में अल्तामिरा कि गुफायें खोजी गयीं लेकिन अगर इस घटना पर गहराई से सोचा जाये तो अपने आप में एक महत्वपूर्ण घटना था इंसान जीव वा छोटे बड़े ज्ञानी अज्ञानी सभी के महत्व को बखूबी समझा जा सकता है।
एक कुत्ता भूल से एक गुफा के भीतर गिर गया बारिस हुई कुछ गीली मिट्टी उसके ऊपर गिर गयी वह कुत्ता नीचे सरक जाता है और दलदल में फंसकर आवाज करता है।
मर्सिलानो नाम का किसान अपने कुत्ते को बाहर निकालने का प्रयास करता है तभी उसे कुछ हड्डियां दिख जाती हैं और वह इतिहास का विद्यार्थी था वह कुत्ते को निकालकर गुफा के और अंदर जाता रहा प्रतिदिन एक एक हड्डी का अध्ययन करता था एक दिन उसकी 7-8 साल की लडकी कहती है पापा मैं भी चलूंगी पिता उसे ले जाता है मर्सिलानो व्यस्त हो जाता है हड्डियों के अध्ययन मे और सर्च लाईट एकदम पास था लडकी सीलिंग की तरफ यानी कि ऊपर की ओर देखने लगी अचानक से वह बोली पापा पापा ऊपर देखो और इस प्रकार से अल्तामिरा की गुफाओं की खोज हो गयी पिताजी प्रतिदिन जाते थे लेकिन सीलिंग तरफ वह देखते तक नहीं थे वह तो हड्डियां बीनने में व्यस्त थे लेकिन 7-8 वर्ष की छोटी लडकी की वजह से कमाल हो गया विश्व की सबसे प्रसिद्ध गुफाओं की खोज हो सकी जो अपने अद्भुत वा रहस्यमयी चित्रों के लिये आज भी प्रसिद्ध है।
जीवन में होने वाली घटनायें हमें वा हमारे जीवन को कोई नया मोड देती हैं प्रत्येक घटना महत्वपूर्ण है प्रत्येक जीव का महत्व है और छोटे बड़े ज्ञानी अज्ञानी समझदार मूढ का भेद नहीं करना चाहिए सभी अपनी जगह महत्व रखते हैं अगर पिता छोटी बच्ची को छोटी समझता उसकी जिज्ञासा को मार देता तो क्या इन गुफाओं का आविष्कार हो पाता?
शायद नहीं होता क्यूंकि बड़े लोग ज्ञानी लोग एक सीमित दायरे तक ही खोज करते हैं लेकिन एक बचपन का निष्छल मन संपूर्ण ब्रह्मांड को भी खोज सकता है आप लंबाई चौडाई उम्र समझदारी में बड़े हो जाओ मन को बच्चा ही रहने दो फिर देखो ना भेदभाव रहेगा ना मानसिक अवसाद होगा हम थोड़े में खुश रहेगें ज्यादा होने का घमंड नहीं होगा।
मन तो अभी बच्चा है जी।
एक कुत्ता भूल से एक गुफा के भीतर गिर गया बारिस हुई कुछ गीली मिट्टी उसके ऊपर गिर गयी वह कुत्ता नीचे सरक जाता है और दलदल में फंसकर आवाज करता है।
मर्सिलानो नाम का किसान अपने कुत्ते को बाहर निकालने का प्रयास करता है तभी उसे कुछ हड्डियां दिख जाती हैं और वह इतिहास का विद्यार्थी था वह कुत्ते को निकालकर गुफा के और अंदर जाता रहा प्रतिदिन एक एक हड्डी का अध्ययन करता था एक दिन उसकी 7-8 साल की लडकी कहती है पापा मैं भी चलूंगी पिता उसे ले जाता है मर्सिलानो व्यस्त हो जाता है हड्डियों के अध्ययन मे और सर्च लाईट एकदम पास था लडकी सीलिंग की तरफ यानी कि ऊपर की ओर देखने लगी अचानक से वह बोली पापा पापा ऊपर देखो और इस प्रकार से अल्तामिरा की गुफाओं की खोज हो गयी पिताजी प्रतिदिन जाते थे लेकिन सीलिंग तरफ वह देखते तक नहीं थे वह तो हड्डियां बीनने में व्यस्त थे लेकिन 7-8 वर्ष की छोटी लडकी की वजह से कमाल हो गया विश्व की सबसे प्रसिद्ध गुफाओं की खोज हो सकी जो अपने अद्भुत वा रहस्यमयी चित्रों के लिये आज भी प्रसिद्ध है।
जीवन में होने वाली घटनायें हमें वा हमारे जीवन को कोई नया मोड देती हैं प्रत्येक घटना महत्वपूर्ण है प्रत्येक जीव का महत्व है और छोटे बड़े ज्ञानी अज्ञानी समझदार मूढ का भेद नहीं करना चाहिए सभी अपनी जगह महत्व रखते हैं अगर पिता छोटी बच्ची को छोटी समझता उसकी जिज्ञासा को मार देता तो क्या इन गुफाओं का आविष्कार हो पाता?
शायद नहीं होता क्यूंकि बड़े लोग ज्ञानी लोग एक सीमित दायरे तक ही खोज करते हैं लेकिन एक बचपन का निष्छल मन संपूर्ण ब्रह्मांड को भी खोज सकता है आप लंबाई चौडाई उम्र समझदारी में बड़े हो जाओ मन को बच्चा ही रहने दो फिर देखो ना भेदभाव रहेगा ना मानसिक अवसाद होगा हम थोड़े में खुश रहेगें ज्यादा होने का घमंड नहीं होगा।
मन तो अभी बच्चा है जी।