कहना तो बहुत कुछ.................पर
अपनी गलती, गलती होती है और दूसरे की गलती अपराध होती है। ये विचार मेरे मन में इसलिये जन्म लिये कि जब मैं मेट्रो में यात्रा कर रहा था तभी खचाखच भरे कोच में एक आधुनिक परिधान पहने हुए २१वीं सदी की लडकी भी यात्रा करने के लिये प्रवेश करती है। अब चूंकी ये ट्रेन है तो अमीर गरीब सभी यात्रा करते हैं साफ सुथरे कपड़े वाले भी और जिनके पास कपड़े साफ करने के लिये पैसे नहीं होते या उनके चेहरे और कपड़ों का रंग ही मटमैला होता है इसीप्रकार का १५-१८ लगभग वर्ष का नवयुवक भी था बेचारा वो निकल ही रहा था कि लडकी के धक्का लग गया आह फिर क्या था आधुनिक परिधानों वाली लडकी शायद कडक चाय पी के आई थी बड़ी जोर से आवाज में दिखता नहीं है स्वारी बोलने से क्या होता लाल पीली आंखों के साथ धक्का मारते हो वो बेचारा निकल ही गया जबकि वास्तव में खचाखच भरी भीड में धक्का उससे गलती से ही लगा था वो भी मामूली धक्का कहीं चोट नहीं आयी उसे जबकि मेट्रो में महिलाओं के लिये आरक्षित कोच भी है। खैर अब भीड ज्यादा दी इत्तेफाक से मैडम मेरे बगल में ही खड़ी थी वो अपने व्हाट्सअप में व्यस्त थी अचानक से ब्रेक लगता अब उन्हें सामने पकडने की जरूरत पड़ी बिना देखे ही हांथ आगे कर दिया अब उनका हाथ मेरे मुख पर बैठ गया फिर क्या मैडम ने बड़ी ही सुरीली आवाज में बोला स्वारी लगी तो नहीं " मैंने चुपचाप ना में सर हिला दिया और शांत हो गया। अब नंबर बैग वाले भईया का था गलती थी उनकी वो बैग टांगे हुए थे जबकि इंस्ट्रेक्सन आते है बैग मत टांगे" का उन्होंने उसको भी डांटा लेकिन उन्होंने ध्यान ही नहीं दिया अब मुझसे फिर सुरीली आवाज में बोलने लगी इंस्ट्रक्शन ही नहीं सुनाई देते लोगों को और भी कुछ बोल रही थी भूल गया मैं फिर जाते जाते पूछने लगीं वैशाली के लिये ट्रेन यही से मिलेगी फिर क्या मैं भी नया था परंतु बुद्धि का प्रयोग किया और रूट मैप देख लिया और उन्हें बता दिया और वो बिना धन्यवाद बोले उतर गईं। तभी मैं एहसास करने लगा कि अपनी गलती गलती होती है और दूसरे की गलती अपराध होती है वो किसी भी स्तर पर हो सबका विचार लगभग एक ही रहता है कुछ रिश्ते तो एक गलती में ही टूट जाते हैं जबकि अगर हम गलती को गलती ही समझें तो रिश्ते प्यारे और सच्चे होते हैं उनकी मंजिल मिले ना मिले पर रिश्तों में प्रेम विश्वास साहस ऊर्जा बहुत होगी। सादर
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